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भरोसे को लगी चोट

मुकेश शर्मा

खेल संपादक, बीबीसी हिंदी

ऐसे समय में जबकि लगने लगा था कि राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियाँ पटरी पर लौट चुकी हैं एक और झटके वाला दिन.

अब तक जिस खेल गाँव को विश्व स्तरीय बताया जा रहा था वो पहली ही परीक्षा में विफल हो गया और फिर उदघाटन और समापन समारोह वाले स्थल जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के पास एक ओवरब्रिज गिर गया.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि सबसे पहले खेल गाँव की जाँच-पड़ताल कर रहे थे और वहीं से ऐसी शिकायतें सामने आईं कि न्यूज़ीलैंड के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख डेव करी ने तो यहाँ तक कह दिया कि 'अगर खेल गाँव ही तैयार नहीं है तो शायद खेल आयोजित ही नहीं हो सकें.'

ओवरब्रिज के गिरने से कई लोगों को चोटें आई हैं मगर उससे ज़्यादा चोट आई है तैयारियों की विश्वसनीयता को.

इसके बाद अब चिंता ये भी हो गई है कि अब तक जिन स्टेडियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बताया जा रहा है वहाँ जब एथलीट्स आकर अभ्यास करेंगे या वहाँ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे तो कहीं वहाँ से भी कुछ नई परेशानियों की बात सामने न आ जाए.

चीन में नवंबर में एशियाई खेल होने हैं वहाँ के स्टेडियम से लेकर खेल गाँव तक सब तैयार है. कई जानकारियों के लिए जब मैंने वहाँ फ़ोन किया तो बहुत ही विनम्रता से मुझे सारी जानकारी सही-सही उपलब्ध भी करा दी गई.

ग्लासगो में अगले राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन होना है और वहाँ भी तैयारी काफ़ी आगे पहुँच चुकी है.

तालमेल में कमी

भारत में जब हमारी खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बात हुई तो साफ़ पता चलता है कि वे इन खेलों को लेकर उतने उत्साहित नहीं हैं और चूँकि इन खेलों का आयोजन ले लिया गया है इसलिए अब उसमें सारे संसाधन झोंके जा रहे हैं.

खेल मंत्रालय और राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के बीच बन नहीं रही है ये तो तभी स्पष्ट हो गया था जब खेल मंत्रालय ने नए दिशानिर्देशों के ज़रिए सुरेश कलमाड़ी सहित कई खेल महासंघों के पदाधिकारियों के पर कतरने की तैयारी की थी.

खेल मंत्रालय आयोजन समिति के नेतृत्त्व से ख़ुश नहीं है. मगर ये खेल देश की प्रतिष्ठा का प्रश्न बने हुए हैं और प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह से लेकर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की प्रमुख सोनिया गाँधी तक कह चुकी हैं कि खेलों का सफल आयोजन होना चाहिए.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस आयोजन को एक उत्सव के तौर पर मनाने को कह रहीं हैं.

खेल गाँव के उदघाटन के समय पर जब 34 में से सिर्फ़ दो टावर दिखाए गए थे तभी ये सवाल उठ रहा था कि बाक़ी को क्यों बंद करके रखा गया है मगर अब इन शिकायतों ने स्पष्ट कर दिया है कि तैयारियाँ जल्दी-जल्दी में पूरी करने के चक्कर में गुणवत्ता को दरकिनार किया जा रहा है.

भारत ने इन खेलों को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया है और लोग भी इसी तौर पर इन खेलों का समर्थन कर रहे हैं मगर कुछ लोगों की लापरवाही करोड़ों भारतीयों को इन आलोचनाओं के सामने नज़रें झुकाने को मजबूर कर रही है.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:45 [IST]
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