नई दिल्ली। पैरा एथलीट दीपा मलिक ने सक्रिय खेलों से संन्यास ले लिया है। उन्होंने कहा कि भले वो संन्यास ले गए, लेकिन अंदर का खिलाड़ी हमेशा याद रहेगा। राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित दीपा ने यह फैसला इस साल की शुरुआत में भारतीय पैरालिंपिक समिति (पीसीआई) का अध्यक्ष बनने से पहले कर लिया था। दीपा ने इसका खुलासा सोमवार को किया। रियो पैरालिंपिक खेल 2016 की गोला फेंक की एफ 53 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली 49 साल की दीपा को दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर फरवरी में हुए चुनाव मे पीसीआई का अध्यक्ष चुना गया था। खेल मंत्रालय ने पीसीआई को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।
दीपा ने कहा, 'किसने कहा कि मैंने आज संन्यास लेने की घोषणा की? नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले पिछले साल सितंबर में ही मैंने संन्यास ले लिया था। मैंने सार्वजनिक घोषणा नहीं की थी।' उन्होंने कहा, 'मैंने संन्यास से संबंधित पत्र पिछले साल (2019) सितंबर में पीसीआई को सौंपा था जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बाद ही मैं पीसीआई अध्यक्ष पद के लिए चुनौती पेश कर पाई थी और मैंने चुनाव जीता और अध्यक्ष बनी।' दीपा को पिछले साल देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया था। दीपा ने सोमवार को ट्वीट किया था, जिसे उन्होंने बाद में हटा दिया।
इस ट्वीट में कहा गया था, 'चुनाव के लिए पीसीआई को बहुत पहले ही पत्र सौंप दिया था, नई समिति को स्वीकृति देने के लिए हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार है और अब खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय से मान्यता के लिए सक्रिय खेलों से संन्यास की सार्वजनिक घोषणा करती हूं। पैरा खेलों की सेवा करने और अन्य खिलाड़ियों की मदद का समय है।'
रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के कारण कमर के नीचे लकवे की शिकार दीपा ने कहा कि उन्होंने सोमवार को पेंशन के लिए आवेदन दिया है, जिसकी पैरालिंपिक पदक विजेता होने के कारण वह हकदार हैं। उन्होंने कहा, 'बात सिर्फ इतनी सी है कि मैंने पेंशन के लिए आवेदन दिया है। पीसीआई अध्यक्ष होने के कारण मैं अब प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकती, मैं नए सफर पर निकल चुकी हूं। लेकिन इसे गलत समझा गया और काफी लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि क्या आपने संन्यास ले लिया है।'
उन्होंने रियो पैरालम्पिक-2016 में गोला-फेंक में सिल्वर मेडल जीता था। उन्होंने पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में एफ-53/54 कैटेगरी में भाला-फेंक में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। पिछले साल 29 अगस्त को उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड मिला था। वो यह अवॉर्ड पाने वाली भारत की दूसरी पैरा-एथलीट थीं। उनसे पहले भालाफेंक खिलाड़ी देवेंद्र झाजरिया ने 2017 में यह पुरस्कार अपने नाम किया था। इससे पहले दीपा को 2012 में अजुर्न अवॉर्ड और 2017 में पद्मश्री अवॉर्ड मिला था। 49 साल की दीपा के पास 58 नैशनल और 23 इंटरनैशनल मेडल हैं।