नई दिल्ली। आज 125 करोड़ की आबादी वाला भारत देश बड़ी उम्मीदों से अपनी होनहार बेटी दीपा करमाकर की ओर निहार रहा है। हर देशवासी की निगाहें केवल दीपा से इल्तजा कर रही हैं कि वो गोल्ड मेडल के साथ ही रियो से वापस आये।
लेकिन लोगों की इन उम्मीदों पर दीपा खरी उतरेंगी या नहीं ये तो 14 अगस्त को पता चलेगा लेकिन मेडल प्रेशर ने दीपा के कोच बिश्वेश्वर नंदी की रातों की नींद जरूर उड़ा दी है।
रायटर्स से बात करते हुए नंदी ने कहा कि इस समय मैं और दीपा दोनों ही मेंटल प्रेशर में है, इस समय भारत की रीयल स्टार बन चुकी दीपा के नाजुक कंधों पर अब पूरे देश की उम्मीदों का बोझ है, हर कोई उससे इतिहास रचने की उम्मीद कर रहा है, इसी बात से मैं भी काफी परेशान हूं, हालांकि इस परेशानी में मुझे खुशी भी हो रही है लेकिन फिर भी हम दोनों पर ही दबाव बढ़ गया है।
दीपा करमाकर ने रचा इतिहास
गौरतलब है कि 52 वर्षो के बाद ओलम्पिक खेलों की जिम्नास्टिक स्पर्धा में पहली भारतीय महिला एथलीट के तौर पर प्रवेश करने वाली दीपा अब 14 अगस्त को इंडिया के लिए मेडल जीतने वाली पहली इंडियन भी बन सकती हैं।
पांच क्वालिफिकेशन सबडिवीजन स्पर्धा में 8वें स्थान पर दीपा जिम्नास्टिक की सभी पांच क्वालिफिकेशन सबडिवीजन स्पर्धा के समापन के बाद वॉल्ट में आठवें स्थान पर रहीं। दीपा ने क्वालिफाइंग स्पर्धा के वॉल्ट में 14.850 अंक हासिल किया।