साल बाद भारत-पाक आमने-सामने

By Staff

चैम्पियंस ट्रॉफ़ी क्रिकेट के 'ग्रुप ए' में सुपरस्पोर्ट पार्क सेंचुरियन में भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होंगी. इससे लगभग एक साल, दो महीने पूर्व भारत-पाकिस्तान के बीच कराची में एशिया कप के दौरान भिडंत हुई थी. उस मैच में भारत के 308 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए यूनिस ख़ान के शतक की बदौलत पाकिस्तान ने भारत को आठ विकेट से हराया था.

पाकिस्तान के कप्तान यूनिस ख़ान उँगली की हड्डी टूटी होने के बावजूद पाकिस्तान की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं क्योंकि वे क्रिकेट की पिच पर भारत-पाकिस्तान की जंग के दौरान ग़ैरहाज़िर नहीं रहना चाहते. शाहिद अफ़्रीदी के नेतृत्व में पाकिस्तान वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ पहला मैच पाँच विकेट से जीत चुका है और स्वभाविक है कि टीम का नोबल काफ़ी अच्छा होगा. उधर भारत की टीम का नेतृत्व महेंद्र सिंह धोनी ही कर रहे हैं जिनका कहना है कि युवराज की कमी तो भारतीय टीम ज़रूर महसूस होगी.

खेल पत्रकार अमित शाह ने बीबीसी को बताया कि ज़हीर ख़ान चाहे कांधे की चोट का इलाज करा रहे हैं लेकिन वे नेट्स पर भारतीय तेज़ गेंदबाज़ो को 'टिप्स' देते देखे गए. दिए उनका कहना था कि यदि भारत की टीम संयम से खेलें तो 300 या 325 रन बना सकती है. लेकिन उन्होंने माना कि पाकिस्तान की टीम में युवाओ और अनुभवी खिलाड़ियों का सही मिश्रण है और कम से कम कागज़ पर आकलन किया जाए तो पाकिस्तानी टीम अपने बल्लेबाज़ों और स्पिनर के साथ-साथ तेज़ गेंदबाज़ों के कारण काफ़ी मज़बूत टीम नज़र आती है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान ने चेम्पियंस ट्रॉफ़ी में भारत को केवल वर्ष 2004 में हुई चेम्पिंस ट्रॉफ़ी में, एक ही बार हराया है. जबकि यदि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के मैचों पर नज़र डालें तो भारत ने विश्व कप में 1992, 1996, 1999 और 2003 में हराया था. वर्ष 2007 के ट्वेंटी-20 विश्व कप में भारत ने पाकिस्तान को दो बार हराया था.

युवराज की कमी चोट के बावजूद मैच खेलने के इच्छुक यूनिस ख़ान ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "शायद अगर कोई और मैच होता तो मैं बेंच पर बैठा रहता. लेकन भारत के ख़िलाफ़ खेलने का मौक़ा हर रोज़ नहीं मिलता. कौन जानता है कि अगली बार भारत के ख़िलाफ़ खेलना दो साल बाद हो. हो सकता है कि खेल के दौरान दर्द महसूस हो....लेकिन मैं बड़ी तस्वीर देख रहा हूँ. यदि मैं शतक लगाता हूँ तो लोगों को ये हमेशा याद रहेगा." जब उनसे मैच से एक दिन पहले पूछा गया कि यदि टॉस जीता तो क्या वे पहले बल्लेबाज़ी करना चाहेंगे तो उन्होंने कुछ हिचकिचाहट जताई.

चोट के बावजूद मैच खेलने के इच्छुक यूनिस ख़ान ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "शायद अगर कोई और मैच होता तो मैं बेंच पर बैठा रहता. लेकन भारत के ख़िलाफ़ खेलने का मौक़ा हर रोज़ नहीं मिलता. कौन जानता है कि अगली बार भारत के ख़िलाफ़ खेलना दो साल बाद हो. हो सकता है कि खेल के दौरान दर्द महसूस हो....लेकिन मैं बड़ी तस्वीर देख रहा हूँ. यदि मैं शतक लगाता हूँ तो लोगों को ये हमेशा याद रहेगा."

जब उनसे मैच से एक दिन पहले पूछा गया कि यदि टॉस जीता तो क्या वे पहले बल्लेबाज़ी करना चाहेंगे तो उन्होंने कुछ हिचकिचाहट जताई.उनका कहना था, "जब मैंने विकेट देखी तो वह बहुत सॉफ़्ट थी. ऐसी विकेट पर आप पहले नहीं खेलना चाहते. लेकिन एक दिन में हो सकता है विकेट कुछ सख़्त हो जाए."

यूनिस ख़ान के मैच खेलने की सराहना करते हुए भारतीय कप्तान धोनी ने कहा, "इतना दृढ़ संकल्प होना प्रशंसनीय है. लेकिन ये भी देखना चाहिए कि आपकी चोट कहीं आपकी टीम के लिए महँगी न पड़ जाए, क्योंकि आप निश्चित तौर पर दस खिलाड़ियों के साथ तो नहीं खेलना चाहते."

युवराज के टीम में न होने पर धोनी का कहना था, "युवराज पावर-प्ले के माहिर हैं, आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हैं और फ़्री-स्ट्रोक प्लेयर हैं. उनकी अनुपस्थिति में अन्य बल्लेबाज़ो की भूमिका बदल सकती है. फ़िलहाल कहना मुश्किल है कि उनकी जगह कौन लेगा. यह इस पर भी निर्भर करता है कि आपको कैसा स्टार्ट मिलता है." उनका कहना था कि यदि किसी खिलाड़ी को चोट लगी हो तो आप कुछ ज़्यादा नहीं कर सकते.

Story first published: Saturday, September 26, 2009, 10:05 [IST]
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