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VIDEO: ट्रायल में सबसे पीछे रहा MP का 'उसेन बोल्ट', अब इतने सेकंड में लगी 100 मीटर दाैड़

नई दिल्ली। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर रामेश्वर गुर्जर का एक वीडियो दाैड़ लगाते हुए खूब वायरल हो रहा था। इस शख्स ने महज 11 सेकंड में 100 मीटर दाैड़ पूरी कर ली, जिसका वीडियो मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत के खेल मंत्री किरन रिजिजु से शेयर करते हुए इस युवा प्रतिभा को तराशने की अपील की थी। गुर्जर की तुलना दुनिया के सबसे तेज धावक उसेन बोल्ट से की जाने लगी। लेकिन जब गुर्जर का सोमावार की सुबह भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में ट्रायल लिया गया तो वह फेल साबित हो गए।

इतने सेकंड में पूरी कर पाए 100 मीटर रेस

इतने सेकंड में पूरी कर पाए 100 मीटर रेस

रामेश्वर गुर्जर को मध्यप्रदेश का उसेन बोल्ट कहा जाने लगा है। लेकिन जब उसका ट्रायल लिया गया तो वह रेस में सबसे पीछे रह गए। इस दौरान गुर्जर को जूते उपलब्ध कराए गए और उसके बाद दौड़ने को कहा गया, लेकिन वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। जूते पहनने के बाद मध्य प्रदेश के गुर्जर ने 12.90 सेकंड में यह रेस पूरी की, जबकि सोशल मीडिया पर उनका जो वीडियो वायरल हो रहा था, उसमें उन्होंने 100 मीटर की रेस 11 सेकेंड में ही पूरी कर ली थी। मध्य प्रदेश के खेलमंत्री भी गुर्जर के ट्रायल के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहे। बता दें रामेश्वर को खुद खेल मंत्री जीतू पटवारी ने ही भोपाल के लिए बुलावा भेजा था और उनके कहने के बाद ही गुर्जर के लिए इस ट्रायल का आयोजन किया गया था, जिसमें वह अपना टारगेट अचीव नहीं कर पाए।

रिजिजू ने शेयर किया वीडियो

केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने रामेश्वर के स्पीड टेस्ट का वीडियो शेयर किया है। रिजिजू ने ये माना है कि भारी पब्लिसिटी के कारण उनपर काफी दबाव था जिससे वो बेहतर परफॉर्म नहीं कर सकते हैं। रिजिजू ने उन्हें ट्रेनिंग दिए जाने का भी भरोसा दिया है। रामेश्वर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के रहने वाले हैं। वह नंगे पैर दौड़ते हुए 100 मीटर दौड़ 11 सेकेंड में पूरी करने में सफल रहे थे। रामेश्वर ने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उनके परिवार में माता-पिता और पांच भाई-बहन हैं। पूरा परिवार खेती-किसानी करता है। रामेश्वर ने परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण आगे पढ़ाई नहीं की।

जीतू पटवारी ने किया दिया हाैसला

जीतू पटवारी ने किया दिया हाैसला

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि सही तो यही था कि उसे 15-20 दिन यहां ट्रेनिंग दी जाती और फिर परखा जाता, लेकिन समाज में एक जिज्ञासा थी इसलिए ऐसी ट्रायल लेना भी जरूरी था। उन्हें अभी भी अकादमी में रखा जाएगा। गांव से आया हुआ लड़का है। बगैर ट्रेनिंग के दौड़ा है। गरीब घर से है, इसलिए वो डाइट नहीं ले पाया होगा जो एक स्प्रिंटर के लिए जरूरी है। उसका वजन भी सात-आठ किलो कम है। वह महीने भर तक यहां रहे ट्रेनिंग लेंगे। अगर 100 मीटर में नहीं तो मिडिल डिस्टेंस में या फिर लांग जंप में काम कर सकतें हैं। ऐसे ट्रायल से फायदा ही होता है।

Story first published: Tuesday, August 20, 2019, 15:32 [IST]
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