टोक्यो, 08 अगस्त। ओलंपिक में देश का नाम रोशन करने वाले और एथलीट में पहली बार भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा अपनी इस सफलता के बाद काफी खुश हैं। ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने कहा कि मैं ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ करना चाहता था, लेकिन जबतक मेरा गोल्ड पक्का नहीं हो जाता तबतक मैं आराम नहीं करना चाहता था। हमारे सभी प्रतिभागी काफी अच्छे थे और वो किसी भी थ्रो में अच्छा कर सकते थे। जैसे ही मैंने देखा कि यह मेरा आखिरी प्रयास है तो मुझे पता लग गया था कि मैं गोल्ड हासिल करने जा रहा हूं और यही वजह है कि मैंने जश्न मनाना शुरू कर दिया।
ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा काफी भावुक हो गए थे। जब वह पोडियम पर पहुंचे और राष्ट्रगान बज रहा था और पीछे तीरंगा लहरा रहा था उस वक्त नीरज गोल्ड मेडल को देखकर भावुक हो गए थे। अपने इस भावुक पल को साझा करते हुए नीरज ने कहा कि यह मेरे लिए भावुक करने वाला पल था। पहली बार किसी भारतीय एथलीट ने ओलंपिक में गोल्ड जीता था।
फाइनल मुकाबले के बारे में नीरज चोपड़ा ने कहा कि सही बताऊं तो दिमाग में यह था कि मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ करना है, जबतक गोल्ड मेडल पक्का ना हो जाए मैंने अपना दिमाग रिलैक्स नहीं किया था। जो बाकी के खिलाड़ी थे वो कभी भी अच्छा कर सकते थे, जब सारे खिलाड़ियों का थ्रो हो गया और मेरा आखिरी थ्रो था और मुझे पक्का हो गया था कि मैं गोल्ड जीत गया हूं उसके बाद ही मैंने अपना जश्न मनाना शुरू किया था।
नीरज ने कहा कि मैं जब स्टेडियम में गया तो दिमाग में यह था ही नहीं कि मैं खेलूंगा, इस लेवल तक पहुंचूंगा, मेडल जीतूंगा। बस भगवान की मेहर है, मैं उसका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। यह बस इत्तेफाक था कि मैं स्टेडियम में गया और जैवलिन फेंकना शुरू किया। ये मेरे कोच और मेरे गुरुजनों का आशीर्वाद था और मेरी मेहनत जिसकी वजह से मैं यहां तक पहुंचा हूं। मेरे परिवार में या गांव से भी कोई आजतक खेल में नहीं गया। लेकिन बाद में मैंने काफी कड़ी मेहनत की और हर किसी की ओर से मुझे काफी मदद मिली। बता दें कि नीरज के मेडल के साथ ही इस बार ओलंपिक में भारत ने कुल 7 मेडल जीते हैं जिसमे एक गोल्ड, दो सिल्वर और चार कांस्य पदक हैं।