सिडनी। आस्ट्रेलियाई टीम सिडनी क्रिकेट मैदान पर हुए चौथे टेस्ट के आखिरी दिन शनिवार को चौथी पारी में रिकॉर्ड 349 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के मैच समाप्त होने तक आठ विकेट ही चटका सकी और भारत यह मैच ड्रा कराने में सफल रहा। हालांकि एडिलेड और ब्रिस्बेन में हुए शुरुआती दोनों मैच जीत चुकी अस्ट्रेलियाई टीम सीरीज 2-0 से हथियाने में सफल रही। शुरुआती दोनों मैच गंवाने के बाद भारत आखिरी दोनो मैच ड्रा कर में कामयाब रहा।
अजिंक्य रहाणे (नाबाद 38) और भुवनेश्वर कुमार (नाबाद 20) के बीच आठवें विकेट के लिए हुई 35 रनों की नाबाद साझेदारी की दौलत भारतीय टीम ने मैच समाप्त होने तक अपनी दूसरी पारी में आठ विकेट पर 252 रन बनाए। चायकाल तक 189 के स्कोर पर सिर्फ दो विकेट गंवाकर स्थिर लग रही भारतीय टीम अर्धशतक लगाकर जम चुके सलामी बल्लेबाज मुरली विजय (80) का विकेट चायकाल के बाद जल्द खो बैठी। कप्तान विराट कोहली (46) ने इसके बाद रहाणे के साथ साझेदारी को सधे अंदाज में आगे बढ़ाना शुरू किया, लेकिन यह साझेदारी 23 रनों तक ही ओ बढ़ सकी थी कि कोहली स्टार्क की गेंद पर शेन वाटसन को कैच थमा पवेलियन लौट गए।
इसके बाद जल्द-जल्द चार विकेट और गिरने के कारण भारत संकट में नजर आने लगा था, हालांकि रहाणे और भुवी ने नाबाद साझेदारी कर टीम को संभाल लिया और मैच ड्रा कराने में सफल रहे। इससे पहले, आस्ट्रेलिया ने चौथे दिन के अपने स्कोर पांच विकेट पर 251 रनों पर दूसरी पारी घोषित कर दी और भारत के सामने एससीजी पर पीछा करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य रखा, जिसके जवाब में टीम इंडिया ने लोकेश राहुल (16) और विजय के बीच सलामी जोड़ी के लिए हुई 48 रनों की साझेदारी की बदौलत सधी शुरुआत की। विजय ने इसके बाद रोहित शर्मा (39) के साथ दूसरे विकेट के लिए 54 और कप्तान कोहली के साथ 74 रनों की साझेदारी निभाई।
पहली पारी में शानदार सैकड़ा लगाने वाले राहुल का विकेट 48 के कुल योग पर गिरा। राहुल ने 40 गेंदों का सामना कर तीन चौके लगाए। उनका विकेट नेथन लॉयन ने लिया। रोहित का विकेट 104 के कुल योग पर गिरा। रोहित ने 90 गेंदों का सामना कर दो चौके और दो छक्के लगाए। रोहित और विजय के बीच 56 रनों की साझेदारी हुई। आस्ट्रेलिया ने डेविड वार्नर (101) और कप्तान स्टीवन स्मिथ (117) की बदौलत सात विकेट पर 572 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित कर दी थी, जिसके जवाब में भारतीय टीम अपने सारे विकेट गंवाकर पहली पारी में 475 रन बना सका।
भारत के लिए पहली पारी में लोकेश राहुल (110) और कोहली (147) ने शतकीय पारियां खेलीं। आस्ट्रेलियाई कप्तान स्मिथ ने दूसरी पारी में भी अपनी टीम के लिए 71 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली। सीरीज में चार शतक लगाकर दिग्गज आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन का रिकॉर्ड ध्वस्त करने वाले स्मिथ को प्लेयर ऑफ द मैच के साथ-साथ प्लेयर ऑफ द सीरज भी चुना गया। आईए हम यहां उन कारणों पर चर्चा करते हैं जिसके चलते भारतीय टीम मैच ड्रा करने में सफल हुई।
रहाणे-भुवनेश्वर की जुझारू बल्लेबाजी
भारत इस मैच में उस वक्त हार की कगार पर नजर आया जब उसके 7 विकेट गिर चुके थे और 11.4 ओवरों का खेल बाकी था। इस संकट की घड़ी में अजिंक्य रहाणे का साथ देने भुवनेश्वर कुमार क्रीज पर उतरे। रहाणे ने जबर्दस्त परिपक्वता का परिचय देते हुए भुवी को साथ लेकर घरेलू टीम को कोई और सफलता हासिल नहीं करने दी। रहाणे ने हर ओवर की अधिकांश गेंदों का सामना खुद किया और चौथी या पांचवीं गेंद पर एक रन लिया। इन्होंने न केवल यह मैच ड्रॉ करवा लिया, बल्कि इस तरह मैच बचाने से इनका मनोबल भी काफी बढ़ गया होगा, जो भविष्य में इनके तथा टीम इंडिया के काम आएगा।
विजय-विराट का शानदार खेल
मुरली विजय ने इस सीरीज के माध्यम से अपनी विशेष पहचान स्थापित की। उन्होंने सीरीज में 482 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया में चार टेस्ट मैचों की सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय ओपनर बने। भारतीय पारी में दो विकेट गिरने के बाद विजय ने कप्तान विराट कोहली के साथ मिलकर पारी को संभाला। इन दोनों ने 22 ओवरों तक घरू टीम को कोई विकेट हासिल नहीं करने दिया। इनकी वजह से ही एक समय ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज पस्त नजर आ रहे थे।