नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को हटाए जाने का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। गौरतलब हो कि बर्मिंघम में 2022 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स से निशानेबाजी को हटाने को लेकर जारी हंगामा ब्रिटिश संसद तक पहुंच गया और संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में इस मुद्दे पर बहस होगी। बता दें कि यह घटनाक्रम भारतीय राष्ट्रीय रायफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष रनिंदर सिंह द्वारा लगातार की गई कोशिशों का नतीजा है और ऐसा समझा जा रहा है कि भारत इन खेलों में निशानेबाजी को दोबारा शामिल कराने के लिए हाउस ऑफ कॉमन्स में विभिन्न दलों का समर्थन जुटाने में सफल रहा है। वहीं अप्रैल में खेल मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने राष्ट्रमंडल खेल महासंघ की अध्यक्ष लुइस मार्टिन और ब्रिटिश सांसद एवं डिजिटल , संस्कृति , मीडिया एवं खेल मंत्री मैट हैनकॉक को अलग अलग पत्र लिखकर उनसे 2022 के कॉमनवेल्थ में निशानेबाजी का स्थान सुनिश्चित कराने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था।
भारत का रहा है शानदार प्रदर्शनः गौरतलब हो कि निशानेबाजी में भारत का अब तक शानदार प्रदर्शन रहा है और साथ ही अगर यह खेल राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल नहीं किया गया तो इससे खिलाड़ियों के साथ-साथ फैंस को भी काफी निराशा होगी। गौरतलब हो कि भारतीय निशानेबाज 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद से इस खेल में काफी पदक जीतते आए हैं। इस साल अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ की निशानेबाजी स्पर्धाओं में भारत ने सात गोल्ड मेडल सहित 16 पदक जीते थे।