इतनी बड़ी उपलब्धि पचाने में थोड़ा समय लगेगा, नीरज ने कहा, ये पल हमेशा मेरे साथ रहेगा

टोक्यो: जब एक एथलीट ओलंपिक के मैदान में अपने देश के लिए गोल्ड मेडल के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा हो तो उस पर दबाव बहुत जबरदस्त होता होगा। या फिर दूसरा पहलू यह है कि वह खिलाड़ी बिना किसी दबाव के केवल उस दिन अपनी परफॉर्मेंस के बारे में सोच रहा होगा। नीरज चोपड़ा दूसरी तरह के खिलाड़ी हैं, जो ना तो गोल्ड मेडल के बारे में सोच रहे थे ना ही उन पर किसी तरह का दबाव था। वह एक मस्त लड़के की तरह मैदान में आना चाहते थे, कुछ खास करना चाहते थे और अपने समय का लुत्फ उठाना चाहते थे।

नीरज ने बगैर किसी दबाव के टोक्यो ओलंपिक में अपने भाले फेंके और हमने देखा उनके शुरुआत की थ्रो ने ही कमाल कर दिखाया। चाहे क्वालिफिकेशन राउंड हो या फिर फाइनल राउंड, उनके शुरुआत के भालों ने ही टोक्यो ओलंपिक में भारत की नियति तय कर दी। नीरज चोपड़ा को करीब से जानने वाले बताते हैं कि फाइनल मुकाबले से पहले उनके ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं था। शायद गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी नीरज को इस बात का अहसास नहीं था कि उन्होंने भारत के लिए क्या कर दिखाया है।

हमने देखा कि 23 साल का यह युवा मेडल जीतने के बाद भी संयमित और शालीन तौर पर अपने चेहरे के हावभाव को शांत रखकर उस क्षण को खामोशी से देख रहा था जिसमें समूचा भारत भावनाओं की लहरों में डूब चुका था। अब जब नीरज घर लौटेंगे तो उनको इस सोने के तमगे की अहमियत के और कई पहलुओं का पता लगना तय है है। उन पर करोड़ों रुपए की बौछार हो चुकी है, क्लास वन की नौकरी इंतजार कर रही है और उन सब से बढ़कर बहुत बड़ी शोहरत देश में कालीन बिछा कर शिद्दत से इंतजार कर रही है।

नीरज ने अपने खेल से अन्य खेल उपलब्धियों को बड़ा ही बौना सा कर दिया है। शायद वे इन चीजों के बारे में सोचते तो गोल्ड नहीं आ पाता, वह दबाव में बिखर जाते। टोक्यो ओलंपिक में गया भारतीय शूटिंग दल इस बात को ज्यादा बेहतर तरीके से बता सकता है। नीरज सोशल मीडिया पर भी 24 घंटे तक सक्रिय नहीं हुए और अब उन्होंने धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को समझना शुरू कर दिया है।

हाल ही में नीरज का ताजा ट्वीट आया है जो गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनका पहला ट्वीट है। इसमें वे लिखते हैं कि अभी भी इस चीज को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह क्या हुआ है।

अक्सर ऐसा ही होता है कई बार खिलाड़ी अपनी तैयारियों में इस कदर परफेक्ट हो जाते हैं कि उनको लगता है कि यह एक मेडल ही तो है। वे इस मेडल के लिए पिछले कई सालों में जो कड़ी तपस्या करते हैं, उस तपस्या का हर घंटे हर दिन उनके लिए एक मेडल की तरह ही बीतता है। नीरज अपनी तैयारियों से बहुत संतुष्ट थे, उन्होंने इस मेडल को हासिल करने के लिए वह सब कुछ किया जो भी कर सकते थे। ऐसे में उनके लिए शायद यह एक सोने का तमगा ही था, लेकिन नीरज जान पा रहे हैं एक भारतीय होने के नाते यह मेडल सिर्फ एक सोने के तमगे से बहुत ज्यादा ऊंचा है।

उन्होंने भारत और दुनिया भर से आने वाली बधाई और आशीर्वाद के लिए लोगों का शुक्रिया अदा किया है और कहा है कि आप सब की दुआओं ने उनको इस स्टेज तक पहुंचाने में मदद की। नीरज कहते हैं कि यह पल उनकी जिंदगी में हमेशा यादगार रहेगा और वह इसको हमेशा जीवित रखेंगे।

नीरज के शब्दों में इस ट्वीट को पढ़ें तो यह इस प्रकार है, "मैं इस भावना को अभी तक प्रोसेस कर रहा हूं। भारत और उससे बाहर सभी लोगों का आपके सहयोग और आशीर्वाद के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, जिसने मुझे इस स्टेज तक पहुंचने में मदद की। ये पल हमेशा मेरे साथ रहेगा।"

Story first published: Sunday, August 8, 2021, 16:22 [IST]
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