
पिछले साल भी मिला था निमंत्रण
महाराष्ट्र के 33 वर्षीय खिलाड़ी काबरा 23 जुलाई से शुरू हो रहे टोक्यो खेलों में पुरुषों की कलात्मक जिमनास्ट की भूमिका निभाते नजर आएंगे। काबरा ने पीटीआई से यह सम्मान प्राप्त करने के बाद कहा, "मुझे पिछले साल मार्च में भी इसके लिए निमंत्रण हासिल हुआ था, लेकिन फिर ओलंपिक को कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया था और इसके बाद एक साल से अधिक समय तक इंतजार करना मुश्किल हो गया।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे अप्रैल में फिर से संदेश प्राप्त हुआ, लेकिन मुझे संदेह था कि क्या कोरोना जैसी गंभीर महामारी के प्रकोप के कारण ओलंपिक होगा या नहीं। लेकिन मुझे खुशी है कि आखिरकार, मैं अपने ओलंपिक सपने को पूरा करने जाऊंगा।"

काैशिक से ली प्रेरणा
काबरा ने काफी देर से खेल में कदम रखा और जल्द ही महसूस किया कि उनके बुनियादी सिद्धांत इतने मजबूत नहीं थे कि एक एथलीट के रूप में इसे बड़ा बना सकें। काबरा ने कहा हैं, "मैंने 2000 में 12 साल की उम्र में बहुत देर से शुरुआत की थी। मैं सूरत में रहता था और उस समय सुविधाएं इतनी बेहतर नहीं थीं। मैंने राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। गुवाहाटी में 2007 के राष्ट्रीय खेलों में भी भाग लिया। मैं जानता था कि एक एथलीट के रूप में मेरा कोई भविष्य नहीं है, मेरे इरादे मजबूत नहीं थे लेकिन मुझमें जुनून था इसलिए मैंने बताैर जज काम देखना शुरू किया। मेरे कोच कौशिक बेदीवाला भी एक जज थे, इसलिए मैंने उनसे प्रेरणा ली और जल्द ही एक कोर्स कर लिया। 2009 में मैं उस कोर्स में टाॅप पर रहा था।"

बताैर जज है अच्छा अनुभव
काबरा के पास जज करने का काफी अनुभव है। वह 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे कम उम्र के जज थे। उन्होंने अभी तक करीब 20 प्रतियोगितायों में बताैर जज काम किया है। वह अब ओलंपिक में भी बताैर जज काम करते दिखेंगे। उन्हें 2018 में एशियाई जिम्नास्टिक्स यूनियन की तकनीकी समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। इसको लेकर उन्होंने कहा कि ओलंपिक तक पहुंचने में कम से कम 12 साल लग जाते हैं और मैं इसे 12 साल बाद पाने के लिए किस्मत वाला रहा।" आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टोक्यो में भारतीय जिम्नास्टिक के लिए प्रणति नायक दम दिखाएंगी।


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