रियो। महज 21 साल की उम्र में रियो ओलंपिक के फाइनल में पहुंचकर पीवी सिंधु ने पहले ही इतिहास रच दिया था। फाइनल मुकाबले से पहले उन्होंने दुनिया के बेहतरीन और उनसे बेहतर रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को हराया जिसके लिए वह सिल्वर पद की हकदार हैं और इसके लिए उनकी जमकर तारीफ होनी चाहिए।
सिंधु के सिल्वर पदक तक के सफर को अलग रखकर अगर सिर्फ आज हुए फाइनल मुकाबले के बात की जाए तो दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी कैरोलीना मरीन जिनकी उम्र महज 23 साल थी वह सिंधू से कई मामलों में आगे दिखी। एक तरह से यूं कहें कि ज्यादातर अंक जो सिंधु ने पहले सेट में हासिल किये वह कैरोलीना मरीन की गलती से हासिल किये।
इस मैच में कैरोलीना की जो खास बात रही वह थी उनकी शानदार स्मैश और जबरदस्त फूर्ती और इसी मामले में सिंधू से वह कहीं आगे निकल गयी। पहले सेट में जिस तरह से सिंधू और कैरोलीना ने काफी अंक शटल कोर्ट आउट हिट करके एक दूसरे को अंक दिये उसने पहले सेट में मैच का रुख साफ नहीं किया। हालांकि पहले सेट में कैरोलीना, सिंधू से काफी तेज सर्विस रिटर्न और स्मैश कर रही थी।
पहला सेट हारने के बाद कैरोलीना अपने पूरे लय में दिखी और उन्होंने ताबड़तोड़ स्मैश मारकर सिंधू के पास वापसी का कोई मौका यहीं छोड़ा। दूसरे सेट की खास बात यह रही कि कैरोलीना सिंधू के कमजोर पक्ष को बेहतर समझ चुकी थी और वह इस बात से वाकिफ थी कि सिंधू बॉडी लाइन स्मैश, फास्ट रिटर्न बेहतर नहीं खेल पा रही है और उन्होंने लगातार सिंधू के इसी कमजोर पक्ष पर हमला जारी रखा।
दूसरे सेट में एकतरफा वर्चस्व दिखाने के बाद जिस तरह से उन्होंने मैच को 1-1 से बराबर किया उसने तीसरे सेट का खेल काफी रोमांचक बना दिया। हालांकि इस सेट के खेल को देखकर लगने लगा था कि तीसरा सेट सिंधू के लिए मुश्किल साबित होने वाला था और हुआ कुछ वैसा ही।
तीसरे सेट में जबरदस्त तेवर के साथ कैरोलीना ने लगातार दो अंक हासिल करके बता दिया था कि यह मैच उनका है। लेकिन इसके बाद कैरोलीना की और से कुछ गलतिया हुई और उन्होंने शटल आउट रिटर्न करके कुछ अंक सिंधू को दिये और इन अंकों ने सिंधू का मैच में विश्वस फिर से वापस लाया।
तीसरे सेट में जिस वक्त मैच 10-11 पर था उस वक्त सिंधू के पास पीछे के पूरे मैच को भूलकर बेहतरीन खेल दिखाने का मौका था, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी अब तक अपने पूरे रंग में आ चुकी थी और इसके बाद कैरोलीना ने एक के बाद एक पावरफुल रिटर्न करके मैच को अपनी ओर खींच लिया।
इस मैच में सिंधू के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह रही कि वह शटल को कोर्ट में रिटर्न करने में बेहतर साबित नहीं हुई और उन्होंने काफी बार शटल को आउट रिटर्न किया जिसके चलते वह लगातार प्वाइंट गंवाती रही।
सिंधू के लिए दूसरी जो सबसे बड़ी दिक्कत रही वह नेट प्ले थे, वह नेट के पास बेहतर रिटर्न करने के मुकाबले में कैरोलीना के मुकाबले काफी पीछे रह गयी। सिंधू के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह रही कि वह कैरोलीना के तेज खेल को धीमा करने में पूी तरह से विफल रही और ताबड़तोड़ स्मैश को रिटर्न नहीं कर सकी।
सबसे अहम कमी जो सिंधू के खेल में देखने को मिली वह थी उनके चेहरे के हाव-भाव। पूरे मैच में सिंधू और कैरोलीना के हाव-भाव एक दूसरे से बिल्कुल अलग थे। एक तरफ जहां पिछड़ने के बाद सिंधू के चेहरे पर भाव दिखने लगते थे, तो दूसरी तरफ कैरोलीना प्वाइंट गंवाने के बाद भी चेहरे पर हावभाव नहीं आने देती थी और मुस्कुराती रहती थी।
कैरोलीना के खेल में जो बेहतरीन बात देखने को मिली वह थी कि वह अंक कमाने के लिए सिंधू पर निर्भर नहीं था। हालांकि उनसे गलतियां हो रही और वह शटल आउट रिटर्न करके सिंधू को अंक दे रही थी लेकिन उनके खेल का सबसे मजबूत पक्ष यह था कि वह अंक को हासिल करने के लिए जूझ नहीं रही थी। जबकि सिंधू को अंक पाने के लिए ज्यादातर कैरोलीना की गलती का इंतजार रहता था।
कैरोलीना की जबरदस्त फूर्ती उनके लिए सबसे अहम हथियार साबित हुआ और पूरे कोर्ट पर उन्होंनें अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। सिंधू के बॉडी लाइन स्मैश सिंधू के लिए काफी मुश्किल साबित हुए। स्मैश के साथ कैरोलीना का खेल हर समय बदल रहा था और इस बात का सिंधू बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लगा पा रही थी कि अब किस तरह का रिटर्न कैरोलीना करेंगी।