
भारत के खाते का पहला गोल्ड:
अर्जेंटीना में चल रहे यूथ ओलंपिक में भारत के जेरेमी लालरिननुगा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारोत्तोलन यानी वेटलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल दिलाया। जेरेमी ने कुल 274 किलो ग्राम (स्नैच में 124 और जर्क में 150 किग्रा) वजन उठाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।
इससे पहले 2010 के सिंगापुर यूथ ओलंपिक में भारत को 8 पदक मिले थे लेकिन भारत के हाथ स्वर्ण के मामले में खाली रह गए थे। ऐसा ही कुछ हाल 2014 के नानजिंग यूथ ओलंपिक का रहा जहां भारत ने दो मेडल जीते तो थे लेकिन उनमे स्वर्ण पदक एक भी नहीं था।

आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग:
15 साल के मिजोरम के रहने वाले जेरेमी आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण पाए हुए हैं। यूथ ओलंपकि के तीसरे संस्करण में जेरेमी को मेडल का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। घरेलू टूर्नामेंट और अन्य कई जगहों पर जेरेमी का प्रदर्शन काफी शानदार रहा था।

बॉक्सिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग में आए और कर दिया कमाल:
2002 मिजोरम की राजधानी आईजोल में जन्मे जेरेमनी बॉक्सर बनना चाहते थे।6 साल की उम्र में वह अपने पापा लालमथुआवा के साथ बॉक्सिंग सीखते थे।उनके पिता भी नेशनल लेवल के बॉक्सर रहे हैं।
हालांकि पुणे में आर्मी इंस्टीट्यूट आने के बाद उनके कोच ने उनके अंदर वेटलिफ्टिंग की प्रतिभा को पहचाना और उनका मार्गदर्शन कर उन्हें इस मुकाम पर ले आए।
आइजोल में वह अपने कोच से थोड़ा बहुत वेटलिफ्टिंग के बारे में सीख चुके थे। लेकिन आर्मी इंस्टीट्यूट ने उन्हें इस क्षेत्र में निपुण बनाया।

चिकनपॉक्स से करियर में बड़ा बदलाव:
चिकनपॉक्स के चलते जेरेमी को 56 किलो भार से 62 किलो भार की श्रेणी में शिफ्ट करना पड़ा।जेरेमी के कोच विजय शर्मा ने उन्हें यूथ ओलंपिक तक 62 किलो भार के लिए ही अभ्यास करने की सलाह दी और अंत में उन्हें इस श्रेणी में चुनौती पेश करने की इजाजत मिल गई।उसके बाद जो हुआ वो इतिहास है।

चिकन और रोनाल्डो से प्यार:
15 साल के इस युवा खिलाड़ी को अपने उम्र के बच्चों की चिकन खाना पसंद है।लेकिन जेरेमी वीडियो गेम और ऐसी चीजों से दूर रहते हैं। ट्रेनिंग से फ्री होने पर जेरेमी फुटबॉल खेलना पसंद करते हैं उनका रियाल मेड्रिड और क्रिस्टियानो रोनाल्डो बेहद पसंद हैं।


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