अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के आदेश पर इस प्रणाली को न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच खेली गई तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला के दौरान लागू किया गया था।
इस प्रणाली के तहत खिलाड़ी मैदान में खड़े अंपायर के किसी भी फैसले पर आपत्ति जता सकते हैं। खिलाड़ियों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद निर्णय का हक तीसरे अंपायर के पास चला जाता है। आईसीसी ने निर्णयों में पारदर्शिता लाने के लिए इस प्रणाली को उपयोग में लाने का फैसला किया है।
पाकिस्तान-न्यूजीलैंड श्रृंखला के दौरान कुल 30 मौकों पर खिलाड़ियों ने मैदान में खड़े अंपायरों के फैसलों पर आपत्ति जताई। न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज ब्रेंडन मैक्लम इसमें से चार बार शामिल रहे। मैक्लम के खिलाफ तीन मौकों पर गलत फैसले दिए गए थे।
इस प्रणाली को लेकर विटोरी ने कहा, "मैं इस प्रणाली से खुश हूं। मेरी नजर में मैदान में खड़े अंपायरों द्वारा दिए गए फैसलों पर भी किसी की कड़ी नजर होनी चाहिए। इसका कारण यह है कि कई मौकों पर जानबूझकर गलत फैसले दिए जाते हैं। खुशी की बात यह है कि खिलाड़ी खुद अंपायर के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।"
विटोरी ने हालांकि यह भी कहा कि किसी भी खिलाड़ी को अंपायर के फैसले के खिलाफ अपील करने से पहले इस बात को लेकर आश्वस्त हो जाना चाहिए कि वह शत-प्रतिशत सही है। अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने की स्थिति में यह नियम मजाक बनकर रह जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।