राजकोट में मंगलवार को होगी धौनी ब्रिगेड की असली परीक्षा
टेस्ट श्रृंखला में शानदार जीत दर्ज करने वाली महेंद्र सिंह धौनी की टीम ने बेशक मोहाली में जीत के साथ ट्वेंटी-20 श्रृंखला बराबर कराने में सफलता हासिल की है लेकिन दो मैचों की इस श्रृंखला ने फटाफट क्रिकेट के लिहाज से भारतीय टीम की कई कमियों को उजागर कर दिया।
खुद कप्तान धौनी ने स्वीकार किया है कि विश्व की सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 टीम बनने के लिए उनकी टीम को अपनी गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में मूलभूत सुधार लाना होगा। नागपुर में खेले गए पहले ट्वेंटी-20 मैच में भारतीय गेंदबाजों ने जहां 212 रन लुटाए थे और क्षेत्ररक्षणों ने चार कैच छोड़े थे वहीं मोहाली में प्रतिद्वंद्वी टीम की रन संख्या 206 तक पहुंची थी और छोड़े जाने वाले कैचों की संख्या बढ़कर छह हो गई थी।
फटाफट क्रिकेट के लिहाज से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच किसी टीम के लिए 20 ओवरों में इतने रन लुटाना और ढेर सारे कैच छोड़ना उसे कभी भी ऊपर नहीं चढ़ने देगा। यह अलग बात है कि भारतीय टीम का मजबूत बल्लेबाजी क्रम उसकी कई कमियों को ढंक लेता है लेकिन बल्लेबाज हर बार चल ही जाएं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
राजकोट में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि मोहाली में उसकी जीत के नायक रहे धुरंधर बल्लेबाज युवराज सिंह का मैदान में उतर पाना तय नहीं है। युवराज की अंगुली में चोट है। यह चोट उन्हें मोहाली के पंजाब क्रिकेट संघ मैदान पर श्रीलंका के साथ ही खेले गए दूसरे ट्वेंटी-20 मुकाबले के दौरान क्षेत्ररक्षण करते वक्त लगी थी।
युवराज ने उस मैच में अंगुली में चोट के बावजूद बल्लेबाजी करते हुए 25 गेंदों पर 60 रन बनाए थे। इससे पहले उन्होंने गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट भी हासिल किए थे। हरफनमौला प्रदर्शन के लिए युवराज को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया था।
टीम सूत्रों का कहना है कि इस चोट के कारण युवराज को पूरी श्रृंखला से बाहर होना पड़ सकता है। रविवार को युवराज के बाएं हाथ की अंगुली का एमआरआई स्कैन किया गया था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक चिकित्सकों ने उन्हें कम से कम तीन सप्ताह तक आराम करने की सलाह दी है।
युवराज को सितंबर में दक्षिण अफ्रीका में खेली गई चैम्पियंस ट्रॉफी से पहले अंगुली में चोट लगी थी। उस समय उनके दाएं हाथ की अंगुली चोटिल हुई थी। इस चोट के कारण युवराज को छह सप्ताह तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था और वह चैम्पियंस ट्रॉफी में नहीं खेल सके थे।
युवराज के स्थान पर दिनेश कार्तिक या फिर रोहित शर्मा को टीम में स्थान मिल सकता है। टीम प्रबंधन ने कहा है कि अंतिम-11 सदस्यों का चयन मैच के दिन पिच की स्थिति को देखने के बाद ही किया जाएगा।
दूसरी ओर, श्रीलंकाई टीम भी इस मैच के लिए कमर कस चुकी है। उसके पास कुमार संगकारा, माहेला जयवर्धने, तिलकरत्ने दिलशान, चमारा कापूगेदेरा, थिलिना कन्डम्बी, उपुल थरंगा, थिलन समरवीरा और सनथ जयसूर्या जैसे अच्छे बल्लेबाज हैं।
दूसरी ओर, मेहमान टीम को मुथैया मुरलीधरन, लसिथ मलिंगा, दिलहारा फर्नाडो, नुवान कुलसेकरा और असंथा मेंडिस से गेंदबाजी में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
संगकारा, जयसूर्या और दिलशान बेहतरीन फार्म में हैं। संगकारा ट्वेंटी-20 श्रृंखला के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे हैं और दिलशान ने टेस्ट तथा ट्वेंटी-20 श्रृंखला में शानदार बल्लेबाजी की है। जयसूर्या का कद अपने आप में इतना बड़ा है कि भारत के कुछ गेंदबाज उनके सामने अपनी गेंदों की दिशा और लंबाई भूल सकते हैं।
ऐसे में भारतीय टीम को सटीक रणनीति, बढ़े हुए आत्मविश्वास और गलती नहीं करने के संकल्प के साथ मैदान में उतरना होगा। पांच मैचों की श्रृंखला का पहला मैच इसलिए भी अहम है क्योंकि जीत के साथ शुरुआत करने वाली टीम को दूसरे और आने वाले मैचों में मनोवैज्ञानिक लाभ मिलता है। ऐसे में धौनी ब्रिगेड को अपनी तमाम कमजोरियों से निजात पाकर खेल पर ध्यान लगाना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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