हैदराबाद| भारतीय टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा का दर्द एक बार फिर से उनकी जुबान पर ही आ ही गया। इंडियन प्राईड सानिया मिर्जा के साथ जितने सफलताएं जुड़ी हुईं है उससे कहीं ज्यादा उनके नाम पर विवाद भी जुड़े हुए हैं। इसलिए गाहे-बेगाहे उनका दर्द उनकी जुबान पर आ ही जाता है।
सानिया ने कहा कि मेरे लिए जबरदस्ती लोग विवादो को पैदा कर देते है लेकिन शायद अगर मैं एक पूरूष होती तो इतने विवाद औऱ इतनी आलोचनाओं का सामना नहीं करती। भारत में एक स्वतंत्र महिला का आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है। सानिया ने तो यहां तक कह दिया कि भारत में सानिया मिर्जा बनना बहुत मुश्किल है।
क्या सच में आज सानिया मिर्जा भारत की बेटी नहीं पाक की बहू है?
मालूम हो कि सानिया का दर्द हैदराबाद के उस आयोजन में निकला जहां उन्हें लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन 'संयुक्त राष्ट्र महिला' ने दक्षिण एशिया में अपना सद्भावना दूत नियुक्त किया है। भारत की सर्वोच्च महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया विश्व टेनिस संघ (डब्ल्यूटीए) की शीर्ष 50 खिलाड़ियों में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला और सद्भावना दूत बनने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला हैं।
पाक बहू कहे जाने पर सिसकीं सानिया कहा औरत होने की मिली सजा
संयुक्त राष्ट्र महिला एसो.ने कहा, "सानिया बड़ी संख्या में बच्चों की आदर्श बन चुकी हैं, जिसमें लड़कियां भी शामिल हैं। उन्होंने अपनी पेशागत उपलब्धियों के बल पर मिली शोहरत का उपयोग सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता लाने के लिए किया है। सानिया ने कन्या भ्रूणहत्या रोकने और भारत में घट रहे लिंगानुपात पर आवाज उठाई है इसके लिए वो तारीफ के काबिल हैं"
गौरतलब है कि जब सानिया मिर्जा को तेलंगाना का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था तो भी काफी विवाद हुआ था, कुछ लोगों को आपत्ति थी कि सानिया, जो कि अब पाकिस्तान की बहू हैं, कैसे किसी भारतीय राज्य की ब्रांड एंबेसडर हो सकती हैं। बवाल बढ़ने पर इंडिया लीजेंड आशा भोंसले ने सानिया के पक्ष में बोलते हुए कहा था कि सानिया को एक औऱत होने की सजा मिल रही है।