रविवार को स्वदेश लौटने पर शानदार स्वागत से अभिभूत सुरंजय ने कहा कि लोगों के मन में उनके लिए प्यार और सम्मान देखकर देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतने की इच्छा हो रही है।
सुरंजय ने 51 किलोग्राम फ्लाईवेट वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। स्वदेश वापसी पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए सुरंजय ने कहा, "विश्व चैम्पियनशिप में हारना मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था। मैं मिलान में अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर सका था। इसके बावजूद मैं खुद को साबित करने के लिए उतावला था और मैंने ऐसा कर दिखाया है। मैं यह स्वर्ण जीतकर खुश हूं।"
मिलान में आयोजित विश्व चैम्पियनशिप के पहले दौर में मिली हार के बाद सुरंजय ने अपने खेल और रणनीति पर काफी सोच-विचार किया था। खासतौर पर वह अपने कोच गुरबख्श सिंह संधू के साथ मिलकर आक्रमण शैली को लेकर काम कर रहे थे।
अपने शिष्य की सफलता से खुश भारतीय टीम के कोच संधू ने कहा, "सुरंजय अब मुकाबलों के दौरान अपने दिमाग का उपयोग करने लगा है। पहले तो वह सिर्फ ताकत का इस्तेमाल करता था लेकिन अब वह अपने प्रतिद्वंद्वी की हरकतों को बारीकी से पढ़ता है। सुरंजय एक बहुत अच्छा मुक्केबाज है। इस स्तर पर पदक जीतना उसके जैसे युवा खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी सफलता है। यह अतुलनीय सफलता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।