माधवराव सिंधिया स्टेडियम में मौजूद 25 हजार से अधिक दर्शकों ने इस रोमांच से भरपूर मुकाबले का जमकर लुत्फ उठाया। इस मैच के रोमांच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 400 से अधिक रन बनाने के बावजूद भारतीय टीम को जीत के लिए अंतिम गेंद तक इंतजार करना पड़ा।
पल-पल बदलते हालात के बीच भारतीय प्रशंसक यह सोचकर अपने मन को दिलासा दे लेते थे कि एकदिवसीय क्रिकेट के अब तक के इतिहास में इससे पहले सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है, जब 400 से अधिक रनों का लक्ष्य देने के बाद किसी टीम को हार नसीब हुई है।
सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान, उपुल थरंगा और कप्तान कुमार संगकारा की शानदार बल्लेबाजी के कारण एक समय भारतीय क्रिकेट टीम भी इसी नियति की ओर बढ़ती दिख रही थी लेकिन आशीष नेहरा की सूझबूझ और काफी हद तक किस्मत ने मैच की आखिरी गेंद पर उसके सिर तीन रनों के अंतर से जीत का सेहरा बांध ही दिया।
टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने श्रीलंका के सामने 415 रनों का पहाड़ सरीखा लक्ष्य रखा था। जवाब में खेलने उतरी श्रीलंकाई टीम रोमांच भरे तमाम उतार-चढ़ावों से गुजरते हुए 50 ओवरों की समाप्ति तक आठ विकेट खोकर 411 रन ही बना सकी।
श्रीलंका की ओर से दिलशान ने सर्वाधिक 160 रन बनाए जबकि संगकारा ने 90 और थरंगा ने 67 रनों का योगदान दिया। थिलिना कन्डम्बी ने महत्वपूर्ण 24 रन बनाए जबकि एंजेलो मैथ्यूज ने जबरदस्त तनाव के बीच 38 रन बनाने में सफल रहे। इन सबके सम्मिलित और बहादुरी भरे प्रयासों के बावजूद श्रीलंकाई टीम अपनी अब तक की सबसे बड़ी जीत से तीन कदम दूर रह गई।
एकदिवसीय मैचों के इतिहास में सिर्फ एक टीम 400 रनों से अधिक के लक्ष्य का पीछा कर पाई है। वह वाकया 26 मार्च, 2006 को जोहांसबर्ग में हुआ था, जब दक्षिण अफ्रीका ने आस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए 434 रनों के असंभव से दिखने वाले लक्ष्य का पीछा करते हुए एक गेंद शेष रहते जीत हासिल की थी।
इस लिहाज से श्रीलंकाई टीम इतिहास रचने से चूक गई। एकदिवसीय मैचों में सबसे बड़ा स्कोर खड़ा करने का रिकार्ड श्रीलंकाई टीम के नाम ही दर्ज है। इस टीम ने चार जुलाई 2006 को एम्सटेलवीन में हॉलैंड के खिलाफ नौ विकेट पर 443 रन बनाए थे।
अब इस टीम के नाम लक्ष्य का पीछा करते हुए दूसरा सबसे बड़ा स्कोर हासिल करने का रिकार्ड भी जुड़ गया है। पहले क्रम पर दक्षिण अफ्रीका है, जिसने हर्शेल गिब्स के शानदार 175 रनों की बदौलत आस्ट्रेलिया के 434 रनों के जवाब में 438 रन बनाए थे।
इससे पहले, भारतीय टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 414 रन बनाए। एकदिवसीय मैचों में भारतीय टीम ने अपना अब तक का सबसे बड़ा योग हासिल किया। इससे पहले 2007 के विश्व कप में भारतीय टीम ने बरमूडा के खिलाफ पांच विकेट के नुकसान पर 413 रन बनाए थे।
भारत की ओर से सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने 102 गेंदों पर 17 चौकों और छह नायाब छक्कों की मदद से सर्वाधिक 146 रन बनाए। सहवाग ने अपना 12वां एकदिवसीय शतक लगाया। उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। इसके अलावा मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने 63 गेंदों पर 10 झन्नाटेदार चौकों और एक छक्के की मदद से 69 और कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 53 गेंदों पर सात चौकों और तीन छक्कों की मदद से 72 रन बनाए।
युवराज सिंह के स्थान पर टीम में जगह पाने वाले विराट कोहली ने 27 रनों का योगदान दिया जबकि रवींद्र जडेजा 17 गेंदों पर एक चौके और दो छक्कों की मदद से 30 रन बनाकर नाबाद लौटे। सहवाग और तेंदुलकर ने पहले विकेट के लिए 19.3 ओवरों में 153 रन जोड़े जबकि कप्तान धौनी और सहवाग ने तीसरे विकेट के लिए मात्र 16 ओवरों में 156 रन जोड़ डाले।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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