रियो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों को दी जा रही सुविधाओं के अभाव पर एक और विवाद सामने आया है। इस बार लिएंडर पेस ने शिकायत की है कि उनको रियो ओलंपिक खेल गांव में रहने के लिए कमरा नहीं दिया गया है। इससे पहले भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों के लिए कुर्सी न होने की वजह से उनको बीन बैग पर बिठाया गया था।
भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस रियो द जेनेरियो पहुंच तो गए लेकिन उनको रहने के लिए वहां खेल गांव में कमरा नहीं एलॉट किया गया। इस तरह के खराब बर्ताव से टेनिस स्टार लिएंडर पेस खासे नाराज हैं।
टीओई से बात करते हुए लिएंडर पेस ने बताया है कि रियो द जेनेरियो के खेल गांव में उनको मिशन प्रमुख राकेश गुप्ता के रूम में रुकना पड़ा। कप्तान जीशान अली ने लिएंडर पेस का समर्थन किया है और कहा कि पेस ने कभी नहीं कहा कि वह खेल गांव में नहीं रुकेंगे।
पेस ने कहा कि उनको यह जानकर निराशा हो रही है कि उन्होंने भारत के लिए छह ओलंपिक खेला है फिर भी उनको रहने के लिए जगह नहीं दी गई। 'मैं न्यूयार्क में टूर्नामेंट खेल रहा था और जैसे ही मैच खत्म हुआ मैंने रियो की फ्लाइट पकड़ ली थी। 6 अगस्त को मेरा पहला मैच है।'
अपार्टमेंट के तीन रूम में एक जीशान को एलॉट किया गया, दूसरा टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना और तीसरा रूम टीम फीजियो के नाम पर है। लिएंडर पेस के नाम पर कोई रूम नहीं था जिस वजह से उनको मिशन प्रमुख राकेश गुप्ता के कमरे में कपड़े बदलने पड़े।
पेस ने आते ही शुरू की प्रैक्टिस
रियो पहुंचने के बाद पेस ने देर शाम कोच जीशान के साथ प्रैक्टिस किया। जीशान का कहना है कि लिएंडर पेस के बारे में इस तरह की अफवाहें थीं कि उन्होंने रोहन बोपन्ना के साथ रूम शेयर करने से मना किया। लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मुझे और आयोजकों को यह मालूम था कि पेस 4 अगस्त को रियो पहुंचने वाले हैं। 6 अगस्त को होने वाले मैच के लिए जरूर उनके पास समय कम है लेकिन पेस ने आते ही प्रैक्टिस शुरू कर दी।
बोपन्ना और लिएंडर पेस के बीच तनातनी
एक न्यूज एजेंसी ने यह रिपोर्ट दी थी कि पेस ने भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन को यह सूचित किया था कि वह आपसी विवाद की वजह से बोपन्ना के साथ रियो में रूम शेयर नहीं करना चाहते। इसके बाद बोपन्ना ने रियो में डबल्स खेलने के लिए साकेथ मायनेनी को पेस के बदले चुना था लेकिन ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन ने बोपन्ना के डबल्स पार्टनर के लिए पेस को ही रखा।
इसके बाद पेस ने बाकी खिलाड़ियों के साथ 1 अगस्त को ही रियो पहुंचने की मंजूरी दी थी लेकिन वो वाशिंगटन में आयोजित वर्ल्ड टीम टेनिस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने चले गए।
इससे पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब रियो ओलंपिक के आयोजकों ने भारतीय खिलाड़ियों और टीम को सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई। दो दिन पहले भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों के बैठने के लिए कुर्सी की कमी पड़ गई और वे बीन बैग पर बैठे देखे गए। मुख्य कोच रोलेंट ओल्टमैंस ने शिकायत की कि खिलाड़ियों के अपार्टमेंट ठीक तरह से फर्निश्ड नहीं थे।
ऑस्ट्रेलिया और अन्य टीमों ने भी की शिकायत
इसी तरह से ऑस्ट्रेलिया और अन्य टीमों की तरफ से आयोजकों को शिकायत मिली हैं कि ओलंपिक गांव में अनफर्निश्ड रूम में उनको ठहराया गया। यहां तक कि बेसमेंट में आग लगने की वजह से ऑस्ट्रेलियन टीम को बिल्डिंग खाली करनी पड़ी।