नई दिल्ली। कहते हैं भारत प्रतिभाओं का देश हैं, यहां के कोने-कोने में इतिहास रचने वाले नायाब हीरे छुपे हुए हैं, इन्हीं में से एक हीरे का नाम है करमन कौर थांडी, जिन्होंने अपने कौशल और खेल से इंडिया को ही नहीं बल्कि दुनिया को भी अपना मुरीद बना लिया है।
भारत में अभी तक टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा कहीं जाती थीं जिनका उत्तराधिकारी कौन होगा इसके बारे में समय-समय पर चिंता होती थी लेकिन अब चिंता करने वालों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है क्योंकि भारत को अब करमन कौर थांडी मिल गई हैं।
मात्र 17 साल में जूनियर महिला एकल वर्ग में जिस तरह से थांडी ने अपना जौहर दिखाया है उसने लोगों को दांतो तले उंगली दबाने का मौका दे दिया है। इस साल की जनवरी में करमन कौर थांडी ने ऑस्ट्रेलिया की ओलिविया गाडेकी को कोर्ट-10 पर हुए एकतरफा मुकाबले में 6-3, 6-4 से हराकर कामयाबी की एक नई इबारत लिखी थी।
5 फीट 11 इंच की करमन दिल्ली वसंतकुंज स्थित रायन इंटरनैशनल स्कूल में पढती हैं। विश्व की टॉप पांच खिलाड़ियों में अपने नाम का सपना देखने वाली करमन के पिता चेतनजीत सिंह भी अपनी बेटी की इस कामयाबी पर बहुत ज्यादा खुश और गौरवान्वित हैं। उनकी पूरी कोशिश है कि करमन की ट्रेनिंग में वो हर संभव मदद करें। टेनिस एक महंगा गेम हैं बावजूद इसके वो करमन के लिए हर तरह की सुविधा मुहैया कराते हैं।
एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाली करमन ने मात्र 8 साल में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। उसकी इस प्रतिभा को बढ़ावा देने का श्रेय केवल उनके मां-बाप और उनके कोच आदित्य सचदेवा को जाता है जो उन्हें आगे बढ़ने में उतनी ही मेहनत करते हैं जितनी करमन करती हैं।
कोच के मुताबिक करमन में दूसरी सानिया मिर्जा बनने का हूनर हैं। उनका फोरहैंड और बैक सर्विस काफी जबरदस्त है इसी कारण उनके गुरू करमन को इन दो चीजों पर ट्रेनिंग दे रहे हैं। करमन रोज चार घंटे टेनिस की प्रैक्टिस करती हैं और 2 घंटे एक्सरसाइज करती हैं। उनकी उम्र अभी कम है इसलिए उनके कोच को लगता है कि चार साल बाद ग्रैंड सैल्म में बड़ा कमाल करती हैं इसलिए उनकी फि्टनेस और डाइट का विशेष ध्यान दिया जाता है।
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करमन की प्रतिभा से देश के आइकान टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति भी काफी प्रभावित हुए थे इसी कारण उन्होंने करमन को यूरोप टूर पर ट्रेनिंग के लिए अपने खर्चे पर भेजा था। महेश भूपति ने ही करमन को एग्जाम के दौरान फिटनेस पर ध्यान देने के लिए मुंबई के फिजियो मैक्लम को करमन के लिए दिल्ली भेजा था।