विजेन्दर ने इस फाउल के खिलाफ ज्यूरी में अपील की लेकिन उनकी इस अपील को नकार दिया गया। इस कारण विजेन्दर को तीसरे स्थान के लिए लड़ना पड़ा। अपने भार वर्ग में विश्व के सर्वोच्च वरीय मुक्केबाज विजेन्दर ने मुख्य मीडिया सेंटर में बुधवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में कहा कि मुक्केबाजी महासंघ को इस संबंध में दूसरे मुक्केबाजों के मुकाबलों के दौरान ही आवाज उठानी चाहिए था, अगर ऐसा होता तो शायद उनके मुकाबले के दौरान जज इसे लेकर सावधान रहते।
विजेन्दर ने कहा, "मेरी अपील ठुकरा दी गई। इससे पहले भी हमारे कई मुक्केबाजों के खिलाफ स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के मुक्केबाजों ने फाउल खेला था लेकिन हमने उसके खिलाफ कोई अपील नहीं की। इस संबंध में मैं मुक्केबाजी महासंघ के रवैये से निराश हूं। अगर हम समय पर प्रतिक्रिया जाहिर करते तो शायद मेरे मामले में न्यायोचित सुनवाई होती।"
किसी भी मामले को पुन: सुनवाई के लिए जजों के सामने रखने के लिए मुक्केबाजी महासंघ को 500 डॉलर की फीस चुकानी पड़ती है। तो क्या भारी फीस भरने के डर से मुक्केबाजी महासंघ ने बाकी के मुक्केबाजों के मामले के लिए अपील करना जरूरी नहीं समझा? इस संबंध में विजेन्दर ने हालांकि कुछ कहने से इंकार कर दिया लेकिन उनका मानना है कि देरी और लापरवाही के कारण भारत को कम से कम दो स्वर्ण पदकों से हाथ धोना पड़ा है।
विजेन्दर ने कहा, "सोमवार को हमारे चार मुक्केबाज हार गए। हम उस दिन दो स्वर्ण जीत सकते थे लेकिन गलत फैसलों के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यह मुक्केबाजी महासंघ की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों पर गौर करे क्योंकि खिलाड़ी के पास इसके लिए न तो समय होता है और न अधिकार।"
विजेन्दर कहा कि वह स्वर्ण नहीं जीत पाने को लेकर निरााश हैं लेकिन अब उन्होंने अपने इस गम को किनारे रखकर लंदन ओलंपिक और एशियाई खेलों के बारे में सोचना शुरू कर दिया है। विजेन्दर बोले, "मेरा ध्यान एशियाई खेलों और ओलम्पिक पर है। दोहा में मैंने रजत जीता था। उसे मैं स्वर्ण में बदलने का प्रयास करूंगा। साथ ही मैं बीजिंग में जीते गए कांस्य को भी स्वर्ण में बदलने का प्रयास करूंगा। मेरी कोशिश जारी रहेगी क्योंकि यही मेरा धर्म है। इसके लिए निराशा को मन से निकालना बेहद जरूरी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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