नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। 'क्रिकेट के महाकुम्भ' आईसीसी विश्व कप-2011 का गुरुवार को आगाज होना है। विश्व कप के दौरान क्रिकेट प्रेमियों की नजर जहां स्टार क्रिकेटरों पर रहेगी वहीं दूसरी ओर तमाम स्टार क्रिकेटर जिस ट्रॉफी के लिए आपस में भिड़ेंगे, उसकी हैसियत किसी सुपरस्टार से कम नहीं।
विजेता चाहें जो भी हो लेकिन अंतिम पलों में फोटोग्राफर सबसे अधिक तस्वीरें ट्रॉफी की लेंगे। यही नहीं, दो अप्रैल देर रात और तीन अप्रैल की सुबह देश और दुनिया के टेलीविजन चैनल, समाचार पत्र और वेबपोर्टलों पर विजेता खिलाड़ियों के साथ-साथ जिस एक चीज का बोलबाला रहेगा, वह यही ट्रॉफी होगी।
11 किलोग्राम वजनी और 60 सेंटीमीटर ऊंची इस ट्रॉफी के लिए गुरुवार से 14 टीमें के बीच 43 दिनों तक जंग चलेगी। इसे हासिल करने वाला अगले चार वर्षो तक विश्व क्रिकेट का बादशाह कहलाएगा और विजेता कप्तान इसे देख-देखकर इतराया करेगा। आखिर कैसी है यह ट्रॉफी और क्या है इसका इतिहास।
1999 विश्व कप में इस ट्रॉफी को एक आधिकारिक नाम दिया गया। यह नाम था-आईसीसी विश्व कप ट्रॉफी। इससे पहले उसे प्रूडेंशियल कप, बेंसन एंड हेजेज कप, विल्स ट्रॉफी और रिलायंस कप के नाम से जाना गया। यह वह दौर था जब विश्व कप के साथ प्रायोजकों का नाम जोड़ने का चलन था लेकिन 1999 के बाद आईसीसी ने इसके साथ हमेशा के लिए अपना नाम जोड़ दिया।
1975 में पहली बार जब विश्व कप खेला गया था, तब इंग्लैंड की जीवनबीमा कम्पनी-प्रूडेंशियल कॉर्प ने विश्व कप को प्रयाोजित करने का फैसला किया था। उसकी शर्त थी कि विश्व कप के साथ उसका नाम जोड़ा जाए। आईसीसी ने ऐसा ही किया।
इसके बाद 1979 और 1983 विश्व कपों के दौरान भी विश्व कप ट्रॉफी को प्रूडेंशियल कप के नाम से जाना गया। इसी कारण शुरुआती तीनों विश्व कप इंग्लैंड में खेले गए। 1983 में भारत ने विश्व कप जीता और इस तरह यह कप पहली बार भारत आया।
वर्ष 1987 में विश्व कप पहली बार भारत से बाहर आया। इसका आयोजन भारत में किया गया। पाकिस्तान उसका सह-मेजबान था। इस विश्व कप का मुख्य प्रायोजक थी, रिलायंस इंड्रस्ट्रीज। इसी कारण इस विश्व कप ट्रॉफी या फिर यूं कहें कि इस विश्व कप को रिलायंस विश्व कप के नाम से जाना गया।
रिलायंस आज भी विश्व कप का आधिकारिक प्रायोजक है लेकिन विश्व कप ट्रॉफी के साथ उसका नाम नहीं जुड़ा है। इसके बाद विश्व कप 1992 में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की मेजबानी में खेला गया। इसे प्रायोजित किया सिगरेट बनाने वाली बड़ी कम्पनी-बेंसन एंड हेजेज ने और यही कारण था कि इस विश्व कप को बेंसन एंड हेजेज विश्व कप के नाम से जाना गया।
आस्ट्रेलिया की सैर करने और नए नाम से जाने जाने के बाद विश्व कप ट्रॉफी एक बार फिर नए नाम से मशहूर होने के लिए तैयार थी। 1996 में विश्व कप का आयोजन एक बार फिर भारत में हुआ और इस बार इसे प्रायोजित किया सिगरेट बनाने वाली कम्पनी आईटीसी के सबसे बड़े ब्रांड विल्स ने। इसी कारण इस विश्व कप ट्रॉफी को विल्स वर्ल्ड कप ट्रॉफी के नाम से जाना गया।
स्थान और नाम बदलते-बदलते विश्व कप ट्रॉफी मानो थक गई थी। उसने नाम में स्थायित्व की एक गुहार लगाई, जिसे आईसीसी ने सुन लिया और 1999 में इंग्लैंड, वेल्स, आयरलैंड, नीदरलैंड और स्कॉटलैंड की संयुक्त मेजबानी में खेले गए विश्व कप के आठवें संस्करण से इस ट्रॉफी को आईसीसी विश्व कप ट्रॉफी नाम दे दिया गया।
आईसीसी ने ट्रॉफी को एक नया नाम दे दिया था लेकिन उसके पास विजेता टीमों को देने के लिए असल में कोई ट्रॉफी थी ही नहीं। प्रूडेंशियल कप (1975, 1979 और 1983) के बाद जितने भी विश्व कप खेले गए उनके दौरान ट्रॉफियां हमेशा के लिए विजेता टीमों को दे दी गई लेकिन आईसीसी आने वाले समय में ऐसा नहीं करने वाला था।
इसी को ध्यान में रखकर उसने एक आकर्षक ट्रॉफी तैयार करने का फैसला किया। यह ट्रॉफी सोने और चांदी से बनी होनी चाहिए थी और इसी कारण आईसीसी ने इस महत्वपूर्ण काम का जिम्मा लंदन के मशहूर ज्वेलर गेरार्ड एंड कम्पनी को सौंपा। इस कम्पनी को दुनिया क्राउन ज्वेलर्स के नाम से जानती थी।
इस ज्वेलर ने दो महीने में 60 सेंटीमीटर और 11 किलोग्राम वजनी एक खास तरह की ट्रॉफी तैयार की। इसमें सोने और चांदी का प्रयोग किया गया। इसमें एक सोने की परत चढ़ी ग्लोब है, जिसे तीन ओर से स्टम्पों और गिल्ली ने घेर रखा है। ग्लोब गेंद का परिचायक है और स्टम्प तथा गिल्लियां क्रिकेट के तीन विभाग-गेंदबाजी, बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का परिचायक हैं।
इस ट्रॉफी पर पूर्व विजेताओं के नाम उकेरे होते हैं और सबसे खास बात यह है कि मूल ट्रॉफी संयुक्त अरब अमीरात के शहर दुबई में स्थित आईसीसी के मुख्यालय में रखी रहती है। विश्व कप जीतने वाली टीमों को आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी की प्रतिकृति दी जाती है।
क्रिकेट के बहुतेरे प्रशंसक भले ही नहीं जानते हों कि विश्व कप जीतने वाली टीमों को मूल नहीं बल्कि ट्रॉफी की प्रतिकृति दी जाती है लेकिन इसके बावजूद इस ट्रॉफी को लेकर खिलाड़ियों को रोमांच में किसी प्रकार की कमी नहीं आती है।
इसके बावजूद क्रिकेट विश्व कप फीफा विश्व कप के बाद विश्व में सर्वाधिक देखा जाने वाला खेल आयोजन बना हुआ है और जिस ट्रॉफी के लिए यह महाकुम्भ होता है, उसकी हैसियत किसी सुपरस्टार से कम नहीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।