राओनिक ने हालांकि 17 एस और 36 विनर्स लगाए लेकिन उनके चार डबल फॉल्ट और 17 बेजां भूलें उन्हें भारी पड़ीं।
32 वर्षीय फेडरर इस जीत के साथ नौवीं बार विंबलडन के फाइनल में पहुंच गए और अब वह रिकॉर्ड आठवें खिताब से एक कदम दूर रह गए हैं। फेडरर ने 23 वर्षीय राओनिक पर जीत दर्ज करने के बाद अपनी मुट्ठी जश्न में हवा में लहरा दी।
इससे पूर्व पहले सेमीफाइनल में छह बार के ग्रैंड स्लेम चैंपियन जोकोविच ने सेंटर कोर्ट पर अपने शानदार खेल से दिखाया कि क्यों उन्हें मैराथन मैन कहा जाता है और 11वीं सीड दिमित्रोव जैसे युवा तुकरे को अभी उनके स्तर तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ेगा।
अपना 23वां ग्रैंड सेमीफाइनल खेल रहे जोकोविच ने 23 वर्षीय दिमित्रोव को बेसलाइन पर अपने बेहतरीन खेल से निर्णायक मौकों पर रोके रखा।
हालांकि दोनों खिलाड़ियों को सेंटर कोर्ट की बेसलाइन पर ग्राउंड पर टिके रहने को
लेकर काफी संघर्ष करना पड़ा। दोनों खिलाड़ी कई बार फिसले लेकिन दोनों ने ही लाजवाब टेनिस का प्रदर्शन किया।
जोकोविच ने पहला सेट 6-4 से जीता जबकि दिमित्रोव ने दूसरेसेट में शानदार वापसी करते हुए 6-3 से जीत हासिल की। तीसरा सेट टाईब्रेक में खिंचा और इस सेट के टाईब्रेक को जोकोविच ने 7-2 से जीता। यह सेट 52 मिनट तक चला।
चौथा सेट सबसे ज्यादा लंबा रहा और 61 मिनट तक चला। इस सेट का टाईब्रेक टॉप सीड खिलाड़ी ने 9-7 से जीता। जोकोविच ने मैच में 17 एस लगाए और सिर्फ दो डबल फॉल्ट किए जबकि दिमित्रोव ने 15 एस तो मारे लेकिन आठ डबल फॉल्ट भी कर बैठे।
जोकोविच ने छह में से तीन ब्रेक अंक भुनाए वहीं दिमित्रोव 11 में से तीन ब्रेक अंक भुना पाए।
दोनों खिलाड़ियों के विनर्स लगभग एक बराबर रहे। लेकिन बेजाभूलें करने में दिमित्रोव आगे रहे। जोकोविच के रैकेट से 45 विनर्स और 26 बेला भूलें निकली तो दिमित्रोव ने 48 विनर्स लगाने के अलावा 33 बेजा भूलें की।
इस हार के साथ किसी ग्रैंड स्लेम के सेमीफाइनल में पहली बार खेल रहे पहले बुल्गारियाई खिलाड़ी दिमित्रोव का फाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया।