चंडीगढ़, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। इस वर्ष जून में इंग्लैंड में आयोजित ट्वेंटी-20 विश्व कप के एक मुकाबले में इंग्लैंड को हराकर सनसनी फैलाने वाली हॉलैंड क्रिकेट टीम के खिलाड़ी इस खेल को अपने देश में लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार का मुंह ताक रहे हैं।
फुटबाल और हॉकी के चहेतों से भरे इस छोटे से यूरोपीय देश में क्रिकेट को उतनी लोकप्रियता नहीं मिल पाई है, जितने कि उसके खिलाड़ी हकदार हैं।
अपनी 14 सदस्यीय टीम के साथ अभ्यास मैच खेलने भारत पहुंचे हॉलैंड टीम के कप्तान पीटर बोरेन मानते हैं कि उनके देश में क्रिकेट से जुड़ी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है लेकिन इसके बावजूद उसे निखारने के लिए सरकारी मदद नहीं मिल रही है।
बोरेन कहते हैं, "हमें सरकार से किसी प्रकार की मदद नहीं मिलती। सरकार सिर्फ हॉकी और फुटबाल के लिए काम करती है। हमें सिर्फ आईसीसी से मदद मिलती है। हमारे देश में क्रिकेट को लोकप्रियता दिलाना कठिन काम है लेकिन इसके बावजूद हम आशा रखे हुए हैं।"
बोरेन कहते हैं कि 2011 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने के बावजूद भी उनके देश की सरकार ने क्रिकेट के विकास के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।
बकौल बोरेन, "हमारा सफर जारी है। 2011 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने के बाद अब हम वेस्टइंडीज में अगले वर्ष होने वाले ट्वेंटी-20 विश्व कप में खेलने की योग्यता हासिल करने के प्रयास में जुटे हैं।"
हॉलैंड टीम के गेंदबाजी कोच असीम खान कहते हैं कि सरकारी उपेक्षा के बावजूद हॉलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अपने देश में अच्छी घरेलू लीग शुरू की है। इससे न सिर्फ क्रिकेट की संस्कृति का विकास हो रहा है बल्कि इससे नए-एक खिलाड़ी सामने आ रहे हैं।
बकौल खान, "हॉलैंड में अभी लगभग 7000 पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ी हैं। फुटबाल और हॉकी खिलाड़ियों की तुलना में यह संख्या लगभग नगण्य है लेकिन क्रिकेट इस देश में सकारात्मक दिशा में बढ़ रहा है। बल्लेबाजी हमारी ताकत है और हम साथ-साथ गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण पर भी ध्यान दे रहे हैं।"
पाकिस्तान में प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल चुके खान कहते हैं कि भारत दौरे से उनकी टीम को काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा, "यहां खेलकर हमारे खिलाड़ी उपमहाद्वीपीय माहौल से परिचित होंगे। इससे हमें 2011 विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर फायदा पहुंचेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।