वेबसाइट 'फॉक्स स्पोर्ट्स' के मुताबिक मेलबर्न में आयोजित एक समारोह के दौरान अपनी बात रखते हुए चैपल ने कहा कि क्रिकेट प्रशासकों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि क्रिकेट के सबसे परंपरागत स्वरूप पर खतरा मंडराने लगा है।
चैपल ने कहा, "मुझे इस बात की चिंता है कि आज की तारीख में सिर्फ पांच-छह देश ही टेस्ट क्रिकेट खेल रहे हैं जबकि क्रिकेट से जुड़ने वाले नए देश ट्वेंटी-20 और एकदिवसीय मैचों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है, जिसे लेकर क्रिकेट प्रशासकों को मनन करना होगा।"
चैपल के मुताबिक एशेज जैसी ऐतिहासिक श्रृंखलाएं अपनी पहचान बचाए रखने में सफल रही हैं लेकिन इन दिनों जिस हिसाब से मैचों की संख्या पर ध्यान दिया जा रहा है, उससे टेस्ट क्रिकेट को सबसे अधिक खतरा है।
चैपल ने कहा, "हमें मैचों की संख्या पर नहीं, उनकी गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा। आज हमें क्रिकेट के सभी स्वरूपों पर ध्यान देने की जरूरत है लेकिन टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर हमें सबसे अधिक सोचना होगा। हमें यह सोचना होगा कि एक स्वरूप को खतरा पहुंचाए बगैर दूसरे स्वरूप, खासकर टेस्ट क्रिकेट का विकास कैसे किया जाए।"
चैपल के मुताबिक टेस्ट क्रिकेट वित्तीय आधार पर आयोजक देशों के लिए फायदे का सौदा नहीं रहे। साथ ही उनके आयोजन में कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। इनमें से सुरक्षा एक सबसे बड़ा मुद्दा है।
चैपल ने कहा, "ट्वेंटी-20 ने टेस्ट क्रिकेट के लिए खतरा पैदा कर दिया है। यह खतरा क्रिकेट के इस सबसे नए स्वरूप के संक्षिप्त रूप और उससे होने वाले वित्तीय फायदे के कारण है। टेस्ट मैचों के आयोजन को लेकर रुचि नहीं रही क्योंकि इसे लेकर आयोजक देशों को पांच दिनों तक सुरक्षा की व्यवस्था करने सहित कई अन्य तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, ट्वेंटी-20 मैचों का आयोजन ज्यादा सरल और फायदेमंद है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।