पीएम तिवारी
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
कलाई की चोट से उबर रहीं जानी-मानी टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा की नज़रें इस साल होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर लगी हैं. वे कहती हैं कि इन खेलों में देश के लिए पदक जीतना ही उनका लक्ष्य है.
कलाई की इस पुरानी चोट के उभरने की वजह से वे बीते महीने दुबई टेनिस चैंपियनशिप के पहले राउंड से बाहर हो गई थी़. सानिया का कहना है कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को देश का सर्वोच्च नागिरक सम्मान भारत रत्न ज़रूर दिया जाना चाहिए. कोलकाता में सानिया ने अपनी चोट और भविष्य की योजनाओं पर पीएम तिवारी से बातचीत की. बातचीत के मुख्य अंश:
कब तक टेनिस कोर्ट में लौटेंगी ?
दाहिनी कलाई की चोट की वजह से फिलहाल छह हफ़्ते तक मैं अभ्यास नहीं कर सकती. उसके बाद ही मैं अभ्यास शुरू करूंगी. छह सप्ताह बाद विशेषज्ञ इस कलाई की स्थिति का आकलन करेंगे. उसके बाद ही कोर्ट में लौटने पर कोई फ़ैसला होगा.
अक्तूबर में दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से क्या उम्मीदें हैं ?
मैं उसमें ज़रूर खेलूंगी. मेरा लक्ष्य राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए पदक जीतना है. इन खेलों के आयोजन में अभी वक़्त है. उम्मीद है तब तक मैं पूरी तरह फ़िट हो जाऊंगी. मैं अपनी चोट से उबर कर ज़ल्दी ही ख़ास प्रशिक्षण शुरू कर दूंगी.
इन खेलों के लिए तैयारी कैसे करना चाहती हैं ?
मुझे छह सप्ताह तक टेनिस से दूर रहने की सलाह दी गई है. उसके बाद चोट की हालत देख कर मैं राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयारी शुरू करूंगी. उसी समय यह तय होगा कि इन तैयारियों के सिलसिले में कौन से टूर्नामेंट में शिरकत करना है. छह सप्ताह गुज़रने से पहले इस बारे में ठोस तरीक़े से कुछ कहना मुश्किल है.
भारतीय टेनिस टीम के बारे में आपकी क्या राय है ?
इस टीम ने हाल में जिस तरह का प्रदर्शन किया है वह गर्व की बात है. टीम इस समय काफ़ी बढ़िया रंगत में है. फ़ेडरेशन कप के एशिया-ओसियाना ग्रुप-1 में उसका चुना जाना ही बेहतरीन फ़ॉर्म का सबूत है.
टेनिस अकादमियों से उभरते खिलाड़ियों को कितनी मदद मिलेगी ?
हमें देश भर में ऐसी अकादमियों की जरूरत है. इनसे उभरते खिलाड़ियों का आत्मविश्वास तो बढ़ेगा ही, उनमें यह भावना भी पैदा होगी कि कामयाब होने के लिए सिर्फ़ क्रिकेटर बनना ही ज़रूरी नहीं है.
सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने की मांग उठ रही है. आपका क्या ख़्याल है ?
सचिन सचमुच भारत रत्न के हक़दार हैं. मेरी राय में तो सचिन को यह सम्मान ज़रूर मिलना चाहिए. लेकिन इसका फ़ैसला तो सरकार को करना है.