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सही मायने में जीत की हकदार है आस्ट्रेलियाई टीम

आस्ट्रेलियाई टीम सही मायने में इस जीत की हकदार है। कई प्रमुख खिलाड़ियों के बगैर भारत पहुंची इस टीम ने श्रृंखला के मध्य में भी चोट के कारण अपने पांच प्रमुख खिलाड़ियों को 'गंवा' दिया था लेकिन इसके बावजूद उसका हौसला नहीं टूटा।

नागपुर में खेले गए दूसरे और दिल्ली में खेले गए तीसरे मुकाबले को छोड़ दें तो मेहमान टीम ने भारतीय टीम को खुद पर हावी होने का एक भी मौका नहीं दिया। खेल के अलावा मेहमान खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों से कहीं आगे नजर आए।

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के साथ-साथ कई क्रिकेट विश्लेषकों ने कहा कि आस्ट्रेलियाई टीम मानसिक तौर पर भारतीय टीम से आगे है और यही बात रिकी पोंटिंग की टीम को सालों से सर्वोच्च स्तर की टीम बनाए हुए है। गुवाहाटी में खेला गया छठा मुकाबला गंवाने के साथ श्रृंखला हार चुकी भारतीय टीम अपने सम्मान की खातिर सातवां मुकाबला हर हाल में जीतना चाहती थी लेकिन शायद कुदरत को यह मंजूर नहीं था।

मेहमान कप्तान पोंटिंग इस श्रृंखला में मिली जीत से बेहद खुश हैं और यही कारण है कि उन्होंने इस जीत को विश्व कप और चैम्पियंस ट्रॉफी में मिली खिताबी जीत के बराबर महत्वपूर्ण करार दिया। इस जीत के साथ आस्ट्रेलियाई टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हालात चाहें जो भी, वही विश्व की सर्वोत्तम एकदिवसीय टीम है।

इस श्रृंखला के दौरान मेहमान टीम ने ब्रेट ली, जेम्स होप्स, पीटर, सिडल, मोएसिस हेनरिक्स और टिम पेन जैसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी गंवाए। चोट के कारण ये खिलाड़ी श्रृंखला के मध्य में ही स्वदेश लौट गए। आनन-फानन में आस्ट्रेलियाई टीम को स्वदेश से उनके स्थानापन्न बुलाने पड़े। एक समय तो मेहमान टीम के सिर्फ 13 खिलाड़ी ही फिट रह गए थे।

यही नहीं, वह माइकल क्लार्क, ब्रैड हेडिन और नेथन ब्रेकन जैसे दिग्गजों के बगैर ही भारत पहुंची थी लेकिन इसके बावजूद उसके हौसले पस्त नहीं हुए। मंगलवार को आयोजित अभ्यास सत्र के बाद पत्रकारों से मुखातिब पोंटिंग ने कहा था, "हमने यहां शानदार खेल दिखाया है। इस जीत से आने वाली श्रृंखला के लिए हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा।"

दूसरी ओर, धौनी की टीम इस श्रृंखला के दौरान कई मुश्किलों से गुजरी। मेजबान होने के नाते टीम इंडिया ने इस श्रृंखला में अच्छा खेल दिखाया लेकिन कई मामलों में उसका खेल विश्व की नंबर-2 टीम के स्तर का नहीं दिखा। गेंद और बल्ले की लड़ाई में तो भारतीय खिलाड़ी आस्ट्रेलिया के करीब नजर आए लेकिन मानसिक लड़ाई में वे पिछड़ गए। यही कारण है कि भारतीय टीम वडोदरा और हैदराबाद के मैच बहुत कम अंतर से हार गई।

बल्लेबाजों ने भारतीय टीम को सबसे अधिक निराश किया और कुछ खिलाड़ियों ने ही व्यक्तिगत स्तर पर अच्छा खेल दिखाया। कप्तान के बार-बार कहने पर भी वीरेंद्र सहवाग जैसे बल्लेबाज ने अपने स्ट्रोक पर नियंत्रण नहीं रखा और बार-बार एक ही अंदाज में अपने विकेट गंवाते रहे।

गेंदबाजों की भूमिका भी बहुत अच्छी नहीं रही। अहम मुकाम पर भारतीय गेंदबाज जोड़ियां तोड़ने में नाकाम रहे और कई मैचों में उनकी यही कमजोरी टीम को भारी पड़ी। इस श्रृंखला में भारत को जहीर खान जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज और अनिल कुंबले जैसे किसी फिरकी गेंदबाज की कमी खली। हरभजन सिंह की नाकामी ने इस कमी को और बढ़ा दिया।

कुछ युवा खिलाड़ियों ने गिने-चुने मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन आत्मसंयम की कमी के कारण उनका खेल निखरकर सामने नहीं आ सका। कुल मिलाकर इस श्रृंखला के माध्यम से भारतीय टीम को एक अच्छी सीख यह मिली कि अपने घर में किसी मजबूत टीम को हराने के के लिए गेंद और बल्ले की चमक के साथ दिमागी तौर पर मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:26 [IST]
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