नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। विश्व क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में शुमार सचिन रमेश तेंदुलकर ने अपने 20 वर्ष के यशस्वी अंतर्राष्ट्रीय करियर के दौरान जो कुछ हासिल किया है, उसके बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है लेकिन 24 फरवरी, 2010 को ग्वालियर के कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम में जो गाथा लिखी गई, उसके बाद क्रिकेट के जानकार इस मास्टर ब्लास्टर की शख्सियत को नए सिरे से परिभाषित करेंगे।
टेस्ट तथा एकदिवसीय मैचों में 30,000 से अधिक रन और 93 शतक लगा चुके इस महान बल्लेबाज के खाते में 36 वर्ष 306 दिन की उम्र में वह रिकार्ड दर्ज हुआ, जो इससे पहले क्रिकेट इतिहास के तमाम धुरंधरों के लिए एक 'सपने' की तरह था। तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के साथ खेले गए दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया।
तेंदुलकर एकदिवसीय मैचों में 200 रनों की व्यक्तिगत पारी खेलने वाले विश्व के एकमात्र बल्लेबाज बन गए। अपने जीवन के 37वें वर्ष की दहलीज पर खड़े तेंदुलकर ने अपने प्रशंसकों, दोस्तों, परिजनों और खुद को एक नायाब तोहफा दिया। एकदिवसीय मैचोंे में 46 शतक लगाने वाले तेंदुलकर ने अपनी 148 गेंदों की यादगार पारी के दौरान 25 चौके और तीन छक्के लगाए।
एकदिवसीय मैचोंे में 17 हजार से अधिक रन बना चुके तेंदुलकर ने पाकिस्तान के सईद अनवर और जिंबाब्वे के केविन कोवेंट्री का रिकार्ड तोड़ा। अनवर ने भारत के खिलाफ 1997 में चेन्नई में 194 रनों की पारी खेली थी जबकि कोवेंट्री ने 2009 में बांग्लादेश के खिलाफ बुलावायो में नाबाद 194 रन बनाए थे। एकदिवसीय मैचों में इससे पहले तेंदुलकर का सर्वोच्च व्यक्तिगत योग 186 (नाबाद) था, जो उन्होंने 1999 हैदराबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाए थे। तेंदुलकर पांच मौकों पर 150 रनों से अधिक की व्यक्तिगत पारी खेल चुके हैं।
क्रिकेट के रिकार्ड बुक में दर्ज तमाम उपलब्धियां अपने करने वाले इस बल्लेबाज को आज से पहले शायद इस बात का अफसोस होता होगा कि उसके नाम क्रिकेट के किसी स्वरूप में सर्वोच्च व्यक्तिगत रिकार्ड हासिल करने का कीर्तिमान नहीं दर्ज है। अब शायद तेंदुलकर को अपने बल्ले से कोई शिकायत नहीं होगी।
ब्रायन लारा ने जहां टेस्ट मैचों में 400 रनों का सर्वोच्च व्यक्तिगत योग हासिल किया है वहीं कद और प्रतिष्ठा के लिहाज से उनके समतुल्य माने जाने वाले तेंदुलकर के नाम एकदिवसीय मैचों में 200 (नाबाद) रन बनाने का रिकार्ड जुड़ चुका है। क्रिकेट के विश्लेषकों की निगाह में लारा तेंदुलकर से अच्छे बल्लेबाज इसलिए रहे हैं क्योकि उनमें बड़ी पारियां खेलने की काबिलियत थी। तेंदुलकर टेस्ट मैचों में 248 रनों से आगे नहीं बढ़ सके हैं लेकिन एकदिवसीय मैचों का सर्वोच्च योग अपने नाम कर उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा पर लगे प्रश्नचिन्ह को मिटा दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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