सुनील गावस्कर
पूर्व क्रिकेटर
भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ में क़रीबी मुक़ाबला था. दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीतकर ये साबित किया कि वे टक्कर की टीमें हैं.
पहले टेस्ट में जहाँ दक्षिण अफ़्रीका ने अपने प्रदर्शन से मेज़बान टीम को अचंभित किया तो भारत ने भी कोलकाता में शानदार वापसी करके अपनी योग्यता दिखाई.
नागपुर में मिली बड़ी पराजय के बाद अगला टेस्ट जीतकर अपना नंबर वन स्थान बरकरार रखना इसका सबूत थी.
ये अफ़सोस की बात थी कि ये सिरीज़ सिर्फ़ दो टेस्ट मैचों की थी, जबकि ये टेस्ट में नंबर वन स्थान के लिए अनाधिकृत चैम्पियशिप थी.
ऐसी स्थिति में ये सिरीज़ पाँच टेस्ट मैचों की होनी चाहिए थी. वैसे ये दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ भी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की पहल पर और दक्षिण अफ़्रीका क्रिकेट बोर्ड के सकारात्मक जवाब के बाद हुई थी.
समर्थन
इस सिरीज़ ने यह भी साबित किया कि अगर भारत और दक्षिण अफ़्रीका जैसी दो टक्कर की टीमें आमने-सामने हों तो मुक़ाबला दिलचस्प होता है और इसे लोगों का भी समर्थन मिलता है.
तीन वनडे मैच भी ऐसे ही होंगे क्योंकि दोनों टीमें मज़बूत हैं और संतुलित हैं. दक्षिण अफ़्रीका की टीम को कप्तान ग्रैम स्मिथ की कमी खलेगी क्योंकि एक कप्तान को खोना कभी भी आसान नहीं होता.
ज़ाक कैलिस के हाथ में टीम की कमान है. वे पुराने खिलाड़ी हैं और उनके पास काफ़ी अनुभव भी है. इसलिए कुछ ही समय के लिए टीम की कमान संभालना उनके लिए कठिन नहीं होगा.
ये विडम्बना ही है कि भारतीय टीम में ज़हीर ख़ान भी नहीं हैं, जिन्होंने इतनी बार स्मिथ को पवेलियन पहुँचाया है कि दक्षिण अफ़्रीकी कप्तान उनके 'बकरा' कहे जा सकते हैं.
ऐसा लगता है जैसे एक टीम के नुक़सान की भरपाई दूसरे टीम के खिलाड़ी के घायल होने से हो गई है.
वास्तव में यह भारतीय बल्लेबाज़ी और दक्षिण अफ़्रीकी गेंदबाज़ी के बीच एक जंग होगी. क्योंकि मैच सफेद गेंद से खेले जाएँगे, जिसका इस्तेमाल काफ़ी सीमित है और दोनों टीमों के बल्लेबाज़ों को इसका लाभ मिलना चाहिए.
जिन पिचों पर तीनों मैच खेले जाने हैं, उन पर उछाल काफ़ी कम होती है. इसका भी फ़ायदा बल्लेबाज़ों को ही मिलेगा. वे आसानी से फ्रंट फुट पर आकर अपने शॉट्स खेल सकते हैं.
भारतीय टीम में हरभजन सिंह भी नहीं है. इसलिए जब स्लॉग ओवर्स की बात आएगी तो भारत के पास थोड़े अनुभव की कमी रहेगी.
हरभजन सिंह की जगह टीम में शामिल आर अश्विन बल्लेबाज़ी में भी निपुण हैं और उनके टीम में आने से भारतीय कप्तान को आसानी होगी.
अहम
कप्तान धोनी मैच में पाँचवें गेंदबाज़ का कैसे इस्तेमाल करते हैं, ये काफ़ी अहम रहेगा. क्योंकि इस कारण भारत अपने कई मैच हारा है, जो वह जीत सकता था.
टीम में विराट कोहली, सुरेश रैना और रवींद्र जडेजा के टीम में होने से भारतीय फ़ील्डिंग बेहतर होगी.
दक्षिण अफ़्रीका के खिलाड़ियों ने कोलकाता टेस्ट में आश्चर्यजनक रूप से कई आसान कैच छोड़े थे. हालाँकि आम तौर पर उनकी फ़ील्डिंग बेहतरीन रहती है और भारतीयों को आसानी से इतने रन नहीं मिलेंगे.
आईसीसी विश्व कप अब एक साल ही दूर है. इन मैचों से कई खिलाड़ियों को विश्व कप की टीम में अपना दावा पेश करने का मौक़ा मिलेगा.
दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ की तरह वनडे सिरीज़ भी रोमांचक होगी और जैसा कि दोनों टेस्ट मैचों में देखा गया, जो टीम अच्छा फ़ील्डिंग करेगी, वो विजेता बनेगी.
(प्रोफ़ेशनल मैनेजमेंट ग्रुप के सौजन्य से)