चायकाल तक भारतीय टीम ने चार विकेट के नुकसान पर 221 रन बनाए जबकि उसके अगले चार विकेट मात्र पांच रन के अंतर पर गिर गए। अपना पहला टेस्ट खेल रहे एस. बद्रीनाथ चायकाल तक 52 रन और कप्तान महेंद्र सिंह धौनी छह रन बनाकर नाबाद थे।
चायकाल के बाद पहला विकेट धौनी का गिरा, जो 221 रन के कुल योग पर पेवेलियन लौटे। इसके बाद इसी योग पर बद्रीनाथ भी आउट हो गए। उन्होंने 139 गेंदों पर सात चौकों की मदद से 56 रन बनाए।
अपना पहला टेस्ट खेल रहे बंगाल के विकेटकीपर बल्लेबाज वृद्धिमान साहा (0) को भी पेवेलियन लौटने में देर नहीं लगी। साहा 222 रन के कुल योग पर आउट हुए। साहा के विदा होने के बाद 226 रन के कुल योग पर जहीर खान (2) भी आउट हो गए।
खबर लिखे जाने तक भारतीय टीम ने आठ विकेट के नुकसान पर 227 रन बनाए थे। हरभजन सिंह तीन रन बनाकर खेल रहे थे जबकि अमित मिश्रा ने खाता नहीं खोला था। मेहमान टीम की ओर से डेल स्टेन ने पांच विकेट चटकाए हैं।
भारतीय टीम ने सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के रूप में अपना चौथा विकेट गंवाया था। सहवाग 139 गेंदों पर 15 चौकों की मदद से 109 रन बनाने के बाद वायने पार्नेल की गेंद पर आउट हुए थे।
अपने करियर का 18वां और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चौथा शतक लगाने वाले सहवाग का विकेट 192 रन पर गिरा। सहवाग ने बद्रीनाथ के साथ चौथे विकेट के लिए 136 रन जोड़े।
दूसरे दिन के अपने स्कोर बिना कोई विकेट गंवाए 25 रन से आगे खेलते हुए भारतीय टीम ने पहले सत्र में ही तीन महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए।
डेल स्टेन और मोर्न मोर्कल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए गौतम गंभीर (12), मुरली विजय (4) और सचिन तेंदुलकर (7) को चलता किया।
गंभीर मोर्कल की गेंद पर विकेट के पीछे मार्क बाउचर के हाथों लपके गए जबकि विजय को स्टेन ने अपनी एक शानदार इनकटर गेंद पर बोल्ड किया। तेंदुलकर को भी स्टेन ने विकेट के पीछे कैच कराया।
56 रन के कुल योग पर तीन विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम भारी संकट में आ गई थी लेकिन उसके बाद बद्रीनाथ और सहवाग ने चौथे विकेट के लिए 136 रन जोड़कर काफी हद तक अपनी टीम को मुश्किल से उबारने के काम किया।
दक्षिण अफ्रीका ने हाशिम अमला (नाबाद 253) के करियर के पहले दोहरे शतक की बदौलत विशाल स्कोर खड़ा किया। दक्षिण अफ्रीकी टीम के लिए जैक्स कैलिस ने भी 173 रनों की शानदार पारी खेली। कैलिस ने अपने करियर का 34वां शतक लगाते हुए सुनील गावस्कर की बराबरी की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।