भारत के धमाकेदार बल्लेबाज़ गौतम गंभीर का कहना है कि सलामी बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग के संग खेल की शुरुआत करना भी मुश्किल भरा है, पर तीसरे विकेट पर आकर खेलना और जोखिम भरा होता है.
गौतम गंभीर का कहना है कि वो अपनी ख़ूबियों को अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन सहयोगियों के प्रभाव में बह जाने से बचते हैं.
बांग्लादेश में होने वाले त्रिकोणीय वनडे श्रृंखला के लिए रवाना होने से पहले समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में गौतम गंभीर ने कहा, "मेरा अपना खेल है, मेरे खेलने का अपना स्टाइल है. सबसे अच्छी बात ये है कि मैं अपने खेल को अपने करियर के शुरुआत में ही समझ गया. मैं अपनी ताक़त को जानता हूँ और उसी के अनुसार खेलता हूँ."
वीरेंद्र सहवाग के साथ अपनी तुलना पर गंभीर का कहना था, "मैं उस चुनौती को नहीं ले सकता, जो पूरी नहीं कर सकता."
गौतम गंभीर ने अपने प्रदर्शन से ख़ुद को एक धमाकेदार और भरोसेमंद बल्लेबज़ के रुप में स्थापित किया है.
टेस्ट मैचों में तो गंभीर और सहवाग पारी की शुरुआत करते हैं लेकिन वनडे मैचों में गंभीर को सलामी बल्लेबाज़ की जगह सचिन के लिए जगह छोड़नी पड़ती है. ऐसे में वे तीसरे नंबर पर आते हैं.
इस पर उनका कहना था, "तीसरे विकेट पर बल्लेबाज़ी करना चुनौतीपूर्ण है, पर बहुमुखी प्रतिभा को दिखाने का भी अवसर मिलता है."
तीसरे विकेट पर बल्लेबाज़ी की परेशानियों का ज़िक्र करते हुए कहा, "तीसरे विकेट पर बल्लेबाज़ी करना सबसे मुश्किल काम है. ऐसा भी होता है जब पहला विकेट जल्दी गिर जाता है, तब आपको उसी समय विकेट पर जमना होता है, साथ ही पावर प्ले के ओवरों को भुनाना भी होता है."
ओपनर बल्लेबाज़ के फ़ायदे पर उनका कहना था, "जब आप ओपन कर रहे होते हैं तो आपको हर तरह की आज़ादी होती है, आप अपनी तरह की शॉट लगा सकते हैं, क्योंकि दूसरे होते हैं जो आगे खेल को संभाल सकते हैं, लेकिन तीसरे नंबर पर आपको साझेदारी को मज़बूत करना होता है, साथ ही आप एक भी गेंद छोड़ नहीं सकते."
गंभीर ने अपनी बल्लेबाज़ी में थोड़ा ठहराव के बारे में कहा, "हाँ! पहले मैं बेहद आक्रामक हुआ करता था. लेकिन जब आप अपनी क़ाबिलियत से अधिक आक्रामक होते हैं, तो आपका विकेट गिर जाता है. आप 30-40 रन तो जल्दी से बना सकते हैं पर इसके बाद आप वो रन नहीं बढ़ा सकते, जो वाक़ई में अहमियत रखते हैं."