नई दिल्ली। टोक्यो में होने वाले 2020 ओलंपिक खेलों के बॉक्सिंग क्वॉलिफायर के लिये शनिवार को दिग्गज महिला बॉक्सर मैरी कॉम और निखत जरीन के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया। इस बहुप्रतिक्षित मैच में मैरी कॉम ने साबित कर दिया कि आखिरकार क्यों वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों में शुमार हैं और ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने की हकदार हैं। भले ही निखत जरीन इस मुकाबले के लिये बीएफआई से काफी लंबे समय से लड़ाई लड़ रही थी लेकिन क्वॉलिफायर में पहुंचने के लिये ट्रॉयल्स के इस फाइनल मुकाबले में मैरी कॉम का पलड़ा भारी रहा।
51 किग्रा भारवर्ग के इस मुकाबले में 6 बार की विश्व चैम्पियन मैरी कॉम ने निखत जरीन को 9-1 से हराकर फरवरी में चीन में होने वाले ओलंपिक बॉक्सिंग क्वॉलिफायर में अपनी जगह बनाई।
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दोनों खिलाड़ियों ने अपने पहले राउंड के मुकाबलों में जीत हासिल कर फाइनल मुकाबले में एक-दूसरे का सामना किया। पहले राउंड के क्वॉलीफायर मुकाबले में निखत जरीन ने मौजूदा नेशनल चैम्पियन ज्योति गुलिया को हराया तो मैरी कॉम ने रितु गेरेवाल को हराकर फाइनल में एक-दूसरे के साथ भिड़ंत को सुनिश्चित किया।
गौरतलब है कि निखत जरीन ने विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के बाद नवंबर में मैरी कॉम के साथ ट्रॉयल्स करने की मांग की थी। हालांक बीएफआई ने निखत की इस मांग को यह कहते हुये ठुकरा दिया था कि विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत और कांस्य जीतने वाली खिलाड़ियों को ट्रॉयल्स नहीं देना होगा।
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बीएफआई ने हालांकि इससे पहले कहा था कि जो खिलाड़ी विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण और रजत जीतेंगे, केवल उनका ट्रायल नहीं होगा लेकिन बाद में उसने कांस्य जीतने वालों का नाम भी जोड़ते हुए मैरी को ट्रायल्स से मुक्त कर दिया था।
वहीं बाद में बीएफआई ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी ट्रॉयल्स देना होगा जिसमें मैरी कॉम समेत चार खिलाड़ियों का नाम सामने आया जो 51 किग्रा भारवर्ग में भिड़ने वाली थी।
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शनिवार को हुए मुकाबले के बाद यह तय हो गया है कि फरवरी में चीन में आयोजित होने वाले इस मुकाबले में मैरी कॉम भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।