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ब्रायन लारा ने बताया, उनके ही दो वर्ल्ड रिकॉर्ड कैसे बने थे करियर में निराशा की वजह

नई दिल्ली: आज जिस तरह से फटाफट क्रिकेट हो रही है उसके चलते मानसिक स्वास्थ्य के मामले पहले की तुलना में कहीं तेजी से उजागर होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। कंगारू क्रिकेटर ग्लेन मैक्सवेल ने इसकी शुरुआत की थी और फिर बाद में भारतीय कप्तान विराट कोहली समेत अन्य क्रिकेटरों ने भी इसके बारे में बात की। हालांकि ऐसा नहीं है कि ये समस्या क्रिकेट में नई नहीं है बल्कि यह काफी पुरानी भी हो सकती है लेकिन तब क्रिकेटर इसके बारे में बोलते नहीं थे और ना ही ऐसे मामले ज्यादा गंभीरता से लिए जाते हैं।

उपलब्धियां भी पड़ती हैं भारी-

उपलब्धियां भी पड़ती हैं भारी-

इसी बीच वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस मसले को वास्तविक बताते हुए खुलासा किया है कि अपने कैरियर के चरम पर उनको भी निराशा का सामना का सामना करना पड़ा था। लारा हाल ही में डेविड वार्नर की एडिलेड टेस्ट में खेली गई 335 रनों की पारी के चलते सर्खियों में रहे थे क्योंकि एक समय लगने लगा था कि वार्नर लारा का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। बता दें कि लारा के नाम प्रथम श्रेणी और टेस्ट क्रिकेट में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड है। टेस्ट क्रिकेट में तो लारा ने दो बार (1994 और 2004) सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड बनाया था। इस समय भी लारा के बनाए 400 रन एक टेस्ट पारी में किसी बल्लेबाज द्वारा बनाए सबसे ज्यादा रन हैं।

करियर की टॉप स्टेज में निराशा का सबब बने 2 रिकॉर्ड

करियर की टॉप स्टेज में निराशा का सबब बने 2 रिकॉर्ड

इसी बीच लारा ने एक प्रोग्राम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा है,‘मेरे अंतरराष्ट्रीय कैरियर से शुरूआत (1989) से 1995 तक कैरियर ग्राफ ऊपर की तरफ ही गया, लेकिन 1995 से 1998 के बीच प्रदर्शन गिरा।" लारा ने माना कि इस दौरान वर्ल्‍ड र‍िकॉर्ड अपने नाम होने का दबाव उन्होंने महसूस किया और ये वो समय था जब कैरेबियाई टीम अपने सुनहरे दौरे से बाहर निकलकर लगातार नीचे फिसलती जा रही थी। तब यह बात काफी जोरों से उठी थी कि लारा गलत समय पर कैरेबियाई टीम में खेलने आ गए उनको तो क्लाइव लॉयड की वेस्टइंडीज में होना चाहिए था।

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" मैं अपने कमरे में निराश बैठा रहता था"

इस बारे में बात करते हुए कैरेबियाई दिग्गज ने कहा,‘मुझे दोहरे विश्व रिकॉर्ड अपने नाम होने का दबाव झेलना पड़ा। मुझे याद है कि मैं अपने कमरे में निराश बैठा रहता था। मानसिक स्वास्थ्य का मसला असली में है। सभी खेलों में यह होता है और अब खिलाड़ी इस पर बात करने लगे हैं।" लारा ने पहले की तुलना में इसका जिम्मेदार फ्रेंचाइजी क्रिकेट को भी माना है जिसके चलते किसी भी खिलाड़ी के पास पूरे साल में इतना भी समय नहीं है कि वह कुछ दिन आराम कर सके। लारा ने आगे कहा, "कई बार इतनी व्यस्तता बोझ बन जाती है। यह मानसिक रूप से थकाऊ होता है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।"

Story first published: Friday, December 6, 2019, 19:14 [IST]
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