नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज शॉन टेट ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मौजूदा समय के तेज गेंदबाजों को लेकर बात की और बताया कि आज के जमाने के तेज गेंदबाज किस वजह से 150 की स्पीड के मार्क को पार नहीं कर पाते हैं। शॉन टेट ने ऑस्ट्रेलिया के लिये 59 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में शिरकत की है और इस दौरान 150 से ज्यादा स्पीड से गेंद फेंकते नजर आते थे, जबकि कई मौकों पर वह 160 के मार्क को भी छूने में कामयाब हो जाते थे। हालांकि आजकल के गेंदबाज 150 की स्पीड तक पहुंचने भी संघर्ष करते नजर आते हैं और ऐसे में शॉन टेट ने ऐसा होने के पीछे की डिटेल्ड रिपोर्ट तैयार की है।
टेट ने इस दौरान यह भी कहा कि ब्रेट ली और शोएब अख्तर जैसे तेज गेंदबाज इतनी स्पीड से गेंदबाजी सिर्फ इसलिये कर पाते थे क्योंकि उनकी प्रोग्रामिंग में यह पहले से ही थी जबकि आजकल के तेज गेंदबाजों को रॉबट की तरह ट्रेन किया जाता है और टीम के फिजियो इस तरह से काम करते हैं जैसे किसी छोटे बच्चे को चम्मच से खाना खिलाया जा रहा हो।
टेट ने आगे कहा कि हमारे जमाने में गेंदबाज अपने करियर के अनुभव से सीखता था और निर्णय करता था कि उसे क्या करना चाहिये और क्या नहीं। आजकल हर गेंदबाज को टीम के फिजियो और मैनेजर्स की ओर से एक-एक चीज बताई जाती है। गेंदबाज को खुद इस बात की पहचान करनी चाहिये कि कब उसे ब्रेक लेना चाहिये और कब नहीं और किसी के कहने पर उन्हें किसी भी दिन ब्रेक नहीं लेना चाहिये।
स्पोर्टसकीड़ा के साथ बात करते हुए टेट ने कहा,'मैं इसको लेकर लगभग एक घंटे तक बात कर सकता हूं। मुझे लगता है कि आजकल आप कहीं भी जाते हैं तो आपके गेंदबाजी प्रोग्राम एक जैसे ही मिलते हैं, वर्कलोड, प्रोग्राम, आपको यह करना होगा यह नहीं। जहां तक मेरे समय की बात करें तो शोएब अख्तर और ब्रेट ली के जमाने से भी पहले हमारे प्रोग्रां वहां पर थे लेकिन उनमें हमारा बड़ा योगदान होता था। हमें किसी रोबोट जैसी चीज का सामना नहीं करना पड़ता था।
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उन्होंने आगे कहा कि आप एक ही चीज रोज रोज नहीं कर रहे हैं, आप वो नहीं कर रहे हैं जिसके बारे में लोग आपको करने को कह रहे हैं। आपको अपने करियर का थोड़ा अनुभव लेना होता है और वो करना होता है जो अच्छा लगता है और इससे आपका शरीर भी बेहतर महसूस करता है।
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज का मानना है कि खिलाड़ियों के बीच कम प्रोफेशनलिज्म के चलते भी लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि पहले के समय में जब ट्रेनिंग की जाती थी तो वो काफी सारी एक्टीविटीज करते थे। हालांकि अब गेंदबाजों को सिर्फ वही करना होता है जो करने के लिये उन्हें कहा जाता है। कुछ लोगों को गेंदबाजी करने के लिये कहा जाता है तो कुछ लोगों को सिर्फ इसी काम के लिये रखा गया है।