
स्टीव स्मिथ-
अगर विश्व क्रिकेट में इस समय किसी बल्लेबाज की तुलना महान डॉन ब्रेडमैन से की जाती है तो वह स्टीव स्मिथ ही हैं। पूर्व कंगारू कप्तान ने अपना टेस्ट शतक 12वें टेस्ट में लगाया था, इसके बाद वह 60 टेस्ट मैचों में 26 शतक लगा चुके हैं। ब्रेडमैन ने 52 टेस्टों में 29 शतक लगाए थे और 80 पारियां खेली थी। स्मिथ के पहले शतक से गिनना शुरू करें तो उन्होंने 99 पारियां अपने 26वें शतक तक पहुंचने के लिए ली हैं। इंग्लैंड के खिलाफ तो यह गैप और भी कम हो जाता है जहां पर स्मिथ ने 20 मैचों में 11 एशेज शतक जड़े हैं तो वहीं ब्रेडमैन ने 37 मैचों में 19, यह आंकड़े खुद स्मिथ की बेजोड़ बल्लेबाजी को बयां करने के लिए काफी हैं।
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एलिस पेरी
स्मिथ के बाद इस लिस्ट में एक और कंगारू खिलाड़ी को जगह मिली है। ये हैं ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम की ऑलराउंडर एलिस पेरी जो इस समय अपनी लोकप्रियता के शिखर पर हैं। इस दशक में पेरी का टेस्ट औसत 114 का गेंदबाजी औसत 17 से नीचे का रहा है। हालांकि उनके 11 साल के करियर में टेस्ट मैच केवल 8 ही रहे हैं।
ऐसा इसलिए हैं क्योंकि महिला क्रिकेट में अभी भी टेस्ट क्रिकेट पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है। पुरुष खिलाड़ियों से इतर महिला खिलाड़ियों के सफेद गेंद क्रिकेट से रिकॉर्ड को कहीं अधिक तरजीह दी जाती है। एलिस पेरी को महिला क्रिकेट का बेन स्टोक्स भी कहा जाता है। लेकिन महिला क्रिकेट में पेरी का प्रभुत्व स्टोक्स की तुलना में बहुत ज्यादा है।

विराट कोहली
लिस्ट में शामिल एकमात्र भारतीय खिलाड़ी कोहली हैं। 2014 के इंग्लैंड दौरे के बाद से बांग्लादेश के खिलाफ डे-नाइट टेस्ट तक कोहली ने 63 के औसत के साथ बैटिंग की है जिसमें 21 शतक आए हैं और 13 अर्धशतक। कोहली एकमात्र बल्लेबाज हैं जिनका तीनों फार्मेट में औसत 50 या उससे ऊपर हैं।
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सचिन के संन्यास और धोनी की बढ़ती उम्र के बीच दुनिया में अगर किसी क्रिकेटर ने रोज रन बनाने का दबाव अब तक बखूबी झेला है तो वह कोहली ही हैं।

डेल स्टेन
स्टेन इस दशक के एकमात्र गेंदबाज हैं जिन्होंने इस सूची में जगह बनाई है। स्टेन ने यह साबित कर दिया है कि बेजोड़ मेहनत और लगन अंत में आपको वो मुकाम देती है जिसके आप हकदार हैं। स्टेन ने टेस्ट क्रिकेट में ऐसे समय में धमाल मचाया जब कई लोग यह शक करने लगे थे कि क्या टेस्ट मैचों में इतनी ज्यादा मेहनत करना भविष्य के लिहाज से सही है? इन सब शंकाओं का एकमात्र जवाब डेल स्टेन हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में जो नाम कमाया वह क्रिकेट के तीनों फार्मेट में उनके खौफ का पर्याय बना। स्टेन अपने आप में बहुत बड़े ब्रांड क्रिकेटर हैं।
स्टेन ने दशक में नंबर 1 टेस्ट बॉलर के तौर पर एंट्री ली और लगातार चार साल तक इस पॉजीशन को बरकरार रखा। दशक के दूसरे हॉफ तक स्टेन की गति में गिरावट आई और चोटों ने उन्हें परेशान रखा। 2010 के बाद से 14 खिलाड़ियों ने 200 टेस्ट विकेट लिए हैं और उनमें स्टेन का स्ट्राइक रेट सबसे बेहतर हैं जो 43.9 का है।

एबी डिविलियर्स
स्टेन के हमवतन एबी डिविलियर्स इस लिस्ट में जगह पाने वाले दूसरे प्रोटियाज खिलाड़ी हैं। डिविलियर्स को उनके धुआंधार अंदाज के अलावा उनकी ब्लॉकिंग के लिए भी याद रखा जाना चाहिए। इस दशक में हाशिम अमला ने एक बार 50 से कम रन बनाने के लिए एक टेस्ट पारी में 200 से अधिक गेंदों का सामना किया था लेकिन डिविलियर्स ऐसा तीन बार कर चुके हैं।
किसी भी परिस्थिति के हिसाब से स्विच करने में माहिर डिविलियर्स के नाम वनडे क्रिकेट में सबसे तेज 50, 100 और 150 रन बनाने का रिकॉर्ड है। अपनी लय और दिन में डिविलियर्स वह सब कुछ कर सकते हैं जो क्रिकेट में उनके अलावा कोई नहीं कर सकता।


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