15 अगस्त के बाद क्रिकेट में मिली जादुई जीत, अंग्रेजों को समझ आ गया, भारतीयों को छेड़ना ठीक नहीं
लंदनः अभी हम लोग ओलंपिक में अपने शानदार प्रदर्शन के जश्न की खुमारी से उतरे नहीं थे कि क्रिकेट के मैदान से एक बहुत बड़ी जीत आ गई। भारत को इंग्लैंड में टेस्ट इतिहास की एक और यादगार जीत मिली जब उसने लॉर्ड्स में हारी हुई बाजी को आखिरी दिन पलट दिया और क्रिकेट की दुनिया में ऑल टाइम ग्रेटेस्ट विक्ट्री में से एक दर्ज की। टेस्ट मैच जब अपने रोमांच पर होता है तब इसकी रोचकता की क्वालिटी का मुकाबला दुनिया में बहुत कम ही खेल कर पाते हैं। टेस्ट क्रिकेट की बारीकी को थोड़ा समझने की जरूरत है और उसके बाद आप इस खेल में डूब जाते हैं, मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

अब 'मैजिक' देखने की आदत होने लगी है-
भारत को एक ऐसी ही जीत 16 अगस्त को मिली जो दशकों तक याद रखी जाएगी। भारतीय कप्तान विराट कोहली के शब्दों में यह 15 अगस्त के 1 दिन बाद देशवासियों को दिया गया बेहतरीन तोहफा है। भारत जब पांचवें दिन इस मुकाबले में उतरा तो उसके पास बेटिंग में केवल ऋषभ पंत ही बचे थे और वे भी बहुत जल्दी आउट हो गए। अब टीम के पास कोई बल्लेबाज नहीं बचा था और स्कोर 7 विकेट के नुकसान पर 194 रन हो गया था। लेकिन इशांत शर्मा ने पहले 16 रन बनाए और उसके बाद मोहम्मद शमी ने बुमराह के साथ मिलकर कमाल ही कर दिखाया। शमी और बुमराह ने 89 रनों की अटूट साझेदारी करते हुए भारत को उस स्थिति में पहुंचा दिया जहां से वह मैच तो हार नहीं सकता था। शमी 70 गेंदों में 56 रन बनाकर नाबाद लौटे, बुमराह ने 64 गेंदों पर 34 रन बनाए। अब बड़ा सवाल यह था कि क्या 60 ओवर में टीम इंडिया इंग्लैंड को ऑल-आउट कर पाएगी?
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ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत ने यहां भी कर दिखाया-
ऐसे में इस तेज गेंदबाजी आक्रमण एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उनको भारतीय क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ पेस अटैक कहा जाता है। भारत ने इंग्लैंड को 51.5 ओवर में मात्र 120 रनों पर समेट दिया। इस जीत में जसप्रीत बुमराह ने तीन विकेट लिए मोहम्मद सिराज को 4 विकेट मिले, अनुभवी इशांत शर्मा को दो विकेट मिले। गजब का अर्धशतक लगाने वाले मोहम्मद शमी ने 10 ओवर में 13 रन देकर एक विकेट लिया।
इसके साथ ही भारतीय कप्तान विराट कोहली आखिरकार एक ऐसी जीत के कप्तान बन गए हैं जिसको शायद वे ओवरसीज में ढूंढ रहे थे। भारत ने पिछला बड़ा विदेशी दौरा ऑस्ट्रेलिया में किया था जहां पर हमें 2-1 से ऐतिहासिक जीत मिली थी। इस तरह की श्रंखला जीत किसी ओलंपिक गोल्ड मेडल के समकक्ष ही होनी चाहिए और अब भारत एक बार फिर से इंग्लैंड की धरती पर यादगार सीरीज जीत की ओर बढ़ने लगा है।

अंग्रेजों को समझ आ गया, भारतीयों को छेड़ना ठीक नहीं-
यह जीत भावनाओं का सारोबार रही और कप्तान विराट कोहली ने माना है कि मैदान पर जो भी टेंशन हुई उसने भारत के खिलाड़ियों को किसी भी कीमत पर जीत के लिए प्रेरित कर दिया। भारतीय टीम दोगुने जोश के साथ इंग्लैंड को हराने के लिए उतरी और नतीजा यह था कि अंग्रेज 120 रनों पर धराशाई होकर वह मैच गंवा चुके थे जिसको जीतने का सपना उनके कप्तान जो रूट ने संजो कर रखा था। इस मैच में जमकर छींटाकशी देखने को मिली। विराट कोहली, जेम्स एंडरसन उलझे रहे। यही हाल मोहम्मद सिराज, जोश बटलर, जसप्रीत बुमराह के साथ देखने को मिला। इतनी तू-तू मैं-मैं हुई कि क्रिकेट का माहौल लंदन के नाजुक मौसम में गर्म हो गया।
भारत ने पहली पारी में 364 रन बनाए थे जिसमें केएल राहुल का मैन ऑफ द मैच दिलाने वाला शतक शामिल रहा। जो रूट इस मैच में जबरदस्त खेले, उन्होंने नाबाद 180 रन बनाए जिसके दम पर इंग्लिश टीम 391 रनों का स्कोर देखने में सफल रही। भारत ने अगली पारी 8 विकेट के नुकसान पर 298 रनों पर घोषित कर दी और फिर करीब 50 ओवरों में इंग्लैंड को क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स पर समेट दिया।
इसके साथ ही ओलंपिक की खुमारी के बीच क्रिकेट ने क्लास के साथ अपनी वापसी कर ली है। भारत पांच मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गया है। अभी 3 और टेस्ट मैच खेले जाने बाकी है।
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