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जीत की लहर पर सवार भारतीय टीम के चयनकर्ता ले रहे पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाले फैसले

नई दिल्ली। इस समय भारतीय क्रिकेट टीम जीत की लहर पर सवार है। टीम संयोजन, कुछ बड़े खिलाड़ियों और खास करके गेंदबाजों का प्रदर्शन अभी ऐसा है कि यह टीम जो भी फैसले ले रही है उसका परिणाम अच्छा ही आ रहा है। दरअसल कोई भी टीम जब इस स्थिति में होती है तो अच्छे रिजल्ट आने से टीम का हर दाव सटीक लगता है। ऐसा ही एक समय वेस्टइंडीज के साथ था फिर श्रीलंका के साथ ऐसा ही दौर आया, ऑस्ट्रेलिया के प्रदर्शन ने तो हाल के वर्षों तक इस बात को पुख़्ता किया है। ऐसा ही अभी भारतीय क्रिकेट टीम के साथ है। टेस्ट चैंपियनशिप में भारत अभीतक कोई भी मैच नहीं हारी है। अंकतालिका में इसके आसपास भी कोई नहीं है। एकदिवसीय और टी-20 में भी इस टीम के जलवे हैं। लेकिन ऐसा होने मात्र से ही टीम प्रबंधन के द्वारा लिए गए सारे फैसले सही नहीं हो जाते हैं भले परिणाम अधिकांशतः पक्ष में ही क्यों न आएं।

टीम चयन

ऐसी ही बातें वेस्टइंडीज के खिलाफ 6 दिसंबर से शुरू हो रही तीन मैचों की टी-20 सीरीज व तीन वनडे मैचों की सीरीज के लिए चयनकर्ताओं द्वारा चुनी गई भारतीय टीम के संयोजन से जुड़ी हुई है। भारतीय चयनकर्ताओं ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए कुछ अटपटे फैसले लिए हैं जिसपर नज़र डालते हैं, और ऐसा क्यों है यह भी देखते हैं।

ऋषभ पंत को खराब प्रदर्शन के बाद भी तरजीह

ऋषभ पंत को खराब प्रदर्शन के बाद भी तरजीह

वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी-20 सीरीज में ऋषभ पंत फ्लॉप हुए। बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 सीरीज में भी ऋषभ पंत फ्लॉप ही रहे हैं , फिर उनकी विकेट कीपिंग भी हालिया सीरीज में स्तरीय नहीं रही। अब उनके विकेटकीपिंग पर भी सवाल हैं। दूसरी तरफ जब टीम का बैंच मार्क जबरदस्त मजबूत है और हर खिलाड़ी अवसर पाना चाह रहा है तब भी पंत को वेस्टइंडीज दौरे के लिए चुना गया है। ऋषभ पंत मिले मौकों पर अधिकांशतः फ्लॉप ही रहे हैं। उनमें आक्रामकता तो है लेकिन खेल के अन्य जरूरी तत्व धैर्य और खेल की बारीक समझ का अबतक अभाव दिखा है। मिले मौकों में उनके खेलने के बेलौसपन से यह लगता है की वह चीजों को उतनी जल्दी नहीं सिख रहे हैं जिसकी जरूरत इस कड़े प्रतिद्वंदिता में है। हालाँकि यह बेलौसपन खिलाड़ी की खूबी भी हो सकती है और खामी भी। यह बेलौसपन दोधारी तलवार जैसा है। पंत अपनी खूबियों को रिजल्ट में बदल नहीं सके हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की उनकी खूबियों के चलते दूसरे बेहतर खिलाड़ी को समान अवसर न दिए जाएं। उनके हालिया प्रदर्शन से ऐसी उम्मीद थी कि वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे और टी-20 सीरीज में उन्हें बाहर किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके इस ख़राब प्रदर्शन के बावजूद चयनकर्ताओं ने उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में मौका दिया है। ऐसे में चयनकर्ताओं का यह फैसला हैरान करने वाला तो है ही।

संजू सैमसन को मौका नहीं दिया जाना

संजू सैमसन को मौका नहीं दिया जाना

विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 सीरीज में चुना गया था, लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं दिया गया था। अब चयनकर्ताओं ने जब वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 टीम चुनी है, तो संजू को मौका नहीं दिया है। यह हैरान करता है क्योंकि जिस खिलाड़ी को किसी भी सीरीज के लिए चुना जाता है तो उसका यह मतलब होता है की उस खिलाड़ी का प्रदर्शन ऐसा रहा है जिससे उसे टीम में आने का मौका मिला है। तो फिर उस खिलाड़ी को प्रदर्शन करने के मौके भी देने चाहिए। इसकी जरूरत तब और बढ़ जाती है जब वह खिलाड़ी युवा हो। फिर संजू ने विजय हजारे वनडे टूर्नामेंट में गोवा के खिलाफ 211 रन का नाबाद दोहरा शतक बनाया था। यही नहीं आईपीएल 2019 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उनका प्रदर्शन शानदार रहा है जिसमें सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एक शानदार शतक भी शामिल है। फिर संजू सक्षम विकेटकीपर भी हैं। ऐसे प्रदर्शन के बाद अगर चयनकर्ता एक सीरीज में खिलाड़ी को चुनकर उसे बगैर मौका दिए अगले सीरीज के लिए टीम से बाहर कर दें तो इस फैसले को अटपटा ही कहा जाएगा।

शुबमन गिल

शुबमन गिल

शुबमन गिल भी संजू सैमसन के जैसे ही अनलकी रहे। मध्यक्रम बल्लेबाजी क्रम में न्यूजीलैंड दौरे की टी-20 सीरीज के लिए शुबमन गिल टीम में चुने गए थे लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी। फिर भी भारतीय टीम के चयनकर्ताओं ने उन्हें ना तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज में मौका दिया और ना ही साउथ अफ्रीका के साथ सीरीज में और न ही बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 सीरीज में और अब वेस्टइंडीज के लिए चुनी गई टीम में भी युवा शुभमन के ऊपर केदार जाधव को तरजीह मिली है जिनकी उम्र करीब 34 साल है। ये भी बातें समझ से परे है की जब टीम में पांच विशुद्ध गेंबाज को चुना गया है तब केदार जाधव जैसे पार्ट टाइम गेंदबाज की क्या जरूरत है वो भी तब जब टीम संयोजन में रविंद्र जडेजा और युवा शिवम दुबे हों? अगर अनुभव को ही तरजीह देनी थी तो दिनेश कार्तिक को मौका दिया जा सकता था जो अभी अच्छी फॉर्म में भी हैं और कमोबेश बेहतर फील्डर और फिनिशर भी। लेकिन चयनकर्ताओं ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया है।

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Story first published: Saturday, November 23, 2019, 15:47 [IST]
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