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वसीम जाफर पर लगे आरोपों ने मोहम्मद कैफ को किया भावुक, युवाओं को दी ये सलाह

Iqbal Abdullah claims, Manager allowed Maulvi Inside Dressing Room not Wasim Jaffer | वनइंडिया हिंदी

नई दिल्लीः हाल ही में वसीम जाफर विवाद को दिया गया सांप्रदायिक एंगल काफी आगे तक फैल चुका है। कई पूर्व क्रिकेटर भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज के समर्थन में सामने आए हैं, अन्य लोग आश्चर्यचकित हैं कि खेल में धर्म कहां से आया?

मोहम्मद कैफ ने इंडियन एक्सप्रेस के लिए अपने कॉलम में लिखा, "मैंने यूपी में टीमों के लिए खेला है, देश भर के अलग-अलग क्षेत्रों में, भारत, क्लब और इंग्लैंड में काउंटी, और कभी भी मुझे अपने धर्म को लेकर बात नहीं की गई। मैंने रनों की कमी के बारे में चिंता की, अपने टीम के साथियों को बुरी फॉर्म में प्रेरित किया, सोचता था कि गेम कैसे जीता जाए। कभी भी मैं यह सोचकर सोने नहीं गया कि टीम के साथी मेरे धर्म के बारे में क्या सोच सकते हैं।"

कैफ ने याद किए अपने बचपन के दिन-

कैफ ने याद किए अपने बचपन के दिन-

अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए, कैफ ने कहा कि उनके आसपास हिंदू घर थे लेकिन धर्म के आधार पर कोई अलगाव नहीं था। उन्होंने बताया,

"मैं इलाहाबाद से आता हूं, मेरा घर पंडितों की एक कॉलोनी के बहुत करीब था, जहां मुझे इस महान खेल से प्यार हो गया। हमने एक साथ खेला और हमारे जीवन को खेल ने साथ में बांध दिया। मैं भारतीय टीम के बारे में बात भी नहीं कर रहा हूं, यह तो बस मेरे लोकल टीम के अनुभव है। बस पड़ोस में एक स्थानीय टीम है जहां सभी धर्मों के बच्चे मिलते और एक लक्ष्य की ओर खेलते। मुझे लगता है कि मेरे चरित्र को वहां आकार दिया गया था। यह सुंदर खेल समावेशी है, विभिन्न स्वभावों, जातियों, धर्मों, आर्थिक लोगों को एक साथ लाता है।"

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'सचिन साई बाबा की फोटो रखते थे...'

'सचिन साई बाबा की फोटो रखते थे...'

कैफ ने बताया कि सचिन खेल के दिनों के दौरान साई बाबा की फोटो रखते थे, वीवीएस लक्ष्मण के अपने देवता थे। जहीर खान, हरभजन सिंह...सबके अपने विश्वास थे। कैफ ने बताया कि गांगुली और कोच जॉन राइट ने हमको सिखाया कि कोई अपने क्षेत्र के लिए नहीं खेलेगा, बल्कि एक-दूसरे के लिए खेलेगा, भारत के लिए खेलेगा।

अंत में जाफर के बारे में बोलते हुए, कैफ ने कहा कि जाफर के लिए अपनी सफाई में आना और ये सब कहना वास्तव में बहुत कठिन रहा होगा। कैफ ने बताया कि यह परिस्थितियां मौजूद समय की कठिनाईयों को भी बताती हैं जहां पर सोशल मीडिया पर देश को तोड़ने को इतनी बुरी तरह ट्रोल किया जाता है।

कैफ ने कहा- एक कोच की इज्जत दांव पर होती है

कैफ ने कहा- एक कोच की इज्जत दांव पर होती है

कैफ ने आगे कहाा, "हम क्रिकेटर्स के पास केवल प्रतिष्ठा और अखंडता ही होती है। लोगों का प्यार और विश्वास हमकों केवल इसी आधार पर मिलता है। एक सफल करियर के बाद, जो कोई कोच का काम करता है, वह ऐसे ही खिलाड़ी बनाना चाहेगा जो टीम में उस संस्कृति को आगे बढ़ाएं जो सफलता और एकता को जन्म देती है। कुछ मायनों में, यह कोच की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। मुझे याद है कि विश्व कप में हमारी टीम के लिए नारा था - "अब या कभी नहीं!" विचार सरल है: टीम को एकजुट करे, सामान्य कारण, ऊर्जाओं को एक ही दिशा में बढ़ाएं, मन को सामान्य लक्ष्य पर केंद्रित करें। यही सब अच्छे कोच करते हैं।"

'प्रार्थना करना व्यक्तिगत चीज हैं'

'प्रार्थना करना व्यक्तिगत चीज हैं'

कैफ ने आगे कहा कि प्रार्थना या नमाज पढ़ना विशुद्ध रूप से एक व्यक्तिगत चीज है। कैफ ने कहा कि वे इसे ड्रेसिंग रूम में नहीं लेकर जाते लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर कोई ऐसा करता है तो यह अपराध है।

और उन्होंने सभी युवाओं को एक सलाह दी जो इस खेल को खेलने के बारे में सपना देख रहे हैं कि इस सब गड़बड़ में मत उलझो। शुद्ध रहो, खेल आपको पुरस्कृत करेगा। यह एक सुंदर खेल है और इसमें भी सांप्रदायिकता देखने से ज्यादा कोई दुख की बात नहीं हो सकती है। कैफ ने आगे कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम बच्चों को एक अच्छा माहौल छोड़कर जाएं।

Story first published: Saturday, February 13, 2021, 16:40 [IST]
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