धोनी ने बताए करियर के दो यादगार पल, एक है 2011 WC के दौरान 'वंदे मातरम' की आवाजें

MS Dhoni recalls two best momemt of his carrer one of which is chant of Vande Mataram in 2011 WC

नई दिल्ली: इस समय महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट से गायब हैं और उनकी वापसी को लेकर कयासों का दौर जारी है। इस समय रवि शास्त्री के बयान, आईपीएल, चेन्नई सुपर किंग्स के कारण चर्चाओं में रहने वाले धोनी ने खुद भी बात की है जिसमें उन्होंने अपने क्रिकेट करियर को लेकर उन बातों पर रोशनी डाली है जो इससे पहले उजागर नहीं थी। धोनी ने पीटीआई से बात करते हुए बताया है कि उनके पूरे क्रिकेट करियर के दौरान कौन सी घटनाएं उनके दिल के सबसे करीब रही।

धोनी के करियर के दो सबसे यादगार पल

धोनी के करियर के दो सबसे यादगार पल

भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने बुधवार को 2007 विश्व टी 20 और 2011 विश्व कप में जीत के बाद अपनी टीम के लिए मिले शानदार स्वागत समारोह को अपने दिल के करीब माना है। धोनी के नेतृत्व में, भारत ने 2011 में मुंबई के प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम में एकदिवसीय विश्व कप जीतने से पहले दक्षिण अफ्रीका में टी 20 विश्व कप जीता था। धोनी मुंबई में एक उत्पाद के लॉन्चिंग प्रोग्राम में शामिल हुए और उन्होंने अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ क्षणों को याद किया। उन्होंने कहा, "दो घटनाएं हैं जिनका मैं यहां उल्लेख करना चाहूंगा। 2007 (टी 20) विश्व कप के बाद, हम भारत वापस आए और खुली बस की सवारी की और हम मरीन ड्राइव (मुंबई) में खड़े थे।" धोनी ने कहा, "चारों ओर से लोगों की भीड़ हमे देखने के लिए खड़ी थी और लोग अपनी कारों से बाहर आए थे।"

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वानखेड़े में 'वंदे मातरम' का उच्चारण

वानखेड़े में 'वंदे मातरम' का उच्चारण

"तो, सभी के चेहरे पर मुस्कान देखकर मुझे अच्छा लगा। क्योंकि, भीड़ में इतने सारे लोग हो सकते थे जिन्होंने शायद अपनी फ्लाइट मिस कर दी हो, शायद वे महत्वपूर्ण काम के लिए जा रहे थे। जिस तरह का स्वागत, हमें मिला। पूरा मरीन ड्राइव एक छोर से दूसरे छोर तक भरा हुआ था। " इसके अलावा धोनी ने अपने दिल के करीब जो दूसरा पल बताया वह था प्रशंसकों द्वारा "वंदे मातरम" का जोर-जोर से उच्चारण जब भारत यहां मुंबई में 2011 विश्व कप में जीत के करीब था। धोनी तब 91 रनों के अहम खेल में नाबाद रहे थे। उन्होंने बताया, "और दूसरा उदाहरण मैं कहूंगा कि 2011 विश्व कप फाइनल, उस मैच में जब 15-20 रन चाहिए थे, जिस तरह से सभी दर्शकों ने वानखेड़े स्टेडियम में 'वंदे मातरम' करना शुरू किया। धोनी ने कहा, "ये दो पल हैं, मुझे लगता है कि उन्हें दोहराना बहुत मुश्किल होगा। वे दो पल हैं जो मेरे दिल के बेहद करीब हैं।"

"क्रिकेट में लगातार खुद को तराशना होता है"

धोनी ने कहा कि क्रिकेट की अनिश्चितताओं ने इसे देश में सबसे ज्यादा फॉलो किया जाने वाला खेल बना दिया। उन्होंने कहा कि हर बार और हर बार गेंदबाज के आने से यह खेल बदल जाता है। उन्होंने कहा, "क्रिकेट में, हम अपने आप को लगातार अपडेट और बेहतर करते रहते हैं, हम नई चीजों के साथ आते रहते हैं, जैसे रिवर्स-स्वीप 15 साल पहले कुछ ऐसा नहीं था लेकिन अब आप बल्लेबाजों को घूमते हुए देखते हैं और रिवर्स खेलते हैं। और मैं यही कह सकता हूं कि भारतीय क्रिकेट टीम प्रशंसकों की वजह से सफल है।"

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"शुरुआती स्तर पर आए उतार-चढ़ाव"

धोनी ने अपने शुरुआती करियर के बारे में भी कहा, जिसमें उतार-चढ़ाव थे। उन्होंने कहा, "मैं एक छोटे राज्य (झारखंड), एक छोटे शहर (रांची) से आया था, इसलिए हमेशा मेरे लिए चीजें आसान नहीं थी। छोटे उतार-चढ़ाव थे जो मेरे 2003 के भारत ए दौरे तक जारी रहे। उसके बाद से मुझे स्थिर सफलता मिलनी शुरू हो गई। उन्होंने आगे कहा, "चाहे यह एक ब्रांड हो या एक व्यक्ति, आपको अपनी ताकत, अपनी कमजोरी, आप कैसे सुधार करना चाहते हैं, आप किस तरह का प्रयास करना चाहते हैं, इसके बारे में आश्वस्त होना चाहिए। मैंने हमेशा कहा है कि रिजल्ट एक बाई प्रोडक्ट है, यदि आप इस प्रक्रिया का पालन करते हैं, सबसे छोटी चीजों का ध्यान रखते हैं, आपको मनचाहा नतीजा मिलेगा।

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Story first published: Thursday, November 28, 2019, 8:40 [IST]
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