
लगातार घट रही है भारतीय स्पिनर्स की क्वालिटी
80 के दशक में शिवारामकृष्णा ने धमाल मचाया तो 90 के दशक में अनिल कुंबले की फिरकी ने दुनिया भर के बल्लेबाजों को परेशान किया। 2000 की शुरुआत में हरभजन सिंह मिले तो अब भारतीय टीम के लिये आर अश्विन और रविंद्र जडेजा यही काम कर रहे हैं। भारत के पास हमेशा से स्पिन गेंदबाजों का एक बेजोड़ हथियार रहा है लेकिन अब आप नजर डालें तो भारत में स्पिन गेंदबाजी में गिरावट आ गई है।
यूट्यूब के शो द लास्ट विकेट में बात करते हुए मुरली कार्तिक ने कहा,'इस मामले पर नजर डालें तो आपको कुछ समस्यायें नजर आती है। एक स्पिनर के तौर पर आप में कुछ स्किल्स का होना बहुत जरूरी होता है। जब मैंने स्पिन गेंदबाजी सीखी थी तो मैंने बिशन सिंह बेदी से गेंद को स्पिन करना जाना था। एक स्पिनर के तौर पर आपको यह सबसे पहली चीज आनी चाहिये। स्पिन गेंदबाजी की कला से मतलब है कि आप विकेट पर दांव लगा रहे हैं। इसको देखते हुए अगर आप क्वालिटी पर नजर डालें तो पिछले कुछ सालों के अंदर इसमें सिर्फ गिरावट देखने को मिली है।'

कब्र में परेशान हो रही होंगी दिग्गज स्पिनर्स की रूहें
कार्तिक का मानना है कि अश्विन और जडेजा के बाद वाशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल में कुछ हद तक वो टैलेंट नजर आता है लेकिन उसके आगे के गेंदबाजों पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि कहीं कुछ छूट गया है।
उन्होंने आगे कहा,'चीजें बदल गई हैं और उसी के गेंदबाजों की क्वालिटी में भी तेजी से गिरावट आई है। तो अगर आप मुझसे पूछते हैं कि क्या हमारे पास ऐसे क्वालिटी स्पिनर्स हैं जैसे कि पहले हुआ करते थे तो मेरा जवाब न है। मैं पहले भी कह चुका हूं कि यह लगातार गिर रहा है। और जैसा कि मैं कई मौकों पर कह चुका हूं कि जिस तरह से यह नये गेंदबाज बॉलिंग करते हैं, उसे देखकर हमारे दिग्गज खिलाड़ी जो कि अपनी कब्र में लेटे हैं उनकी रूहें बेचैन हो गई होंगी और वो यही कहते होंगे कि कितने वाहियात गेंदबाज हैं यह, क्या हो गया है हमारे बॉलर्स को।'

खत्म हो रहा है भारतीय स्पिनर्स का युग
गौरतलब है कि पूर्व भारतीय स्पिनर और चयनकर्ता लक्ष्मण शिवरामकृष्णनन ने सबसे पहले इस मुद्दे पर जोर दिया और कहा कि भारत को अपनी स्पिन गेंदबाजी के प्रति प्यार को दोबारा जगाने की जरूरत है। 1990 के दशक की तुलना में भारत का पेस अटैक आज ज्यादा खतरनाक है जबकि स्पिनर्स में वो धार नहीं रही जो कि तब हुआ करती थी। आपको बता दें कि मुरली कार्तिक का मानना है कि भारत के पास अब वो स्पिनर्स की क्वालिटी नहीं रही जो कि पिछले दशकों में देखने को मिली है।


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