कप्तान धोनी ने फाइनल में अपनाई 'मुर्गा फंसाओ' तकनीक
[नवीन निगम] चैम्पियन ट्राफी जीतने में रांची के महेंद्र सिंह धोनी ने कल उसी तरकीब का इस्तेमाल किया जिसे हम देशी भाषा में मुर्गा फंसाओ कहते है। आप चौकिए नहीं, कल इंग्लैंड की पारी के 18वें ओवर में धोनी ने इंशात शर्मा के जरिए इसी तकनीक से लगातार दो विकेट निकाले। आप को वो विज्ञापन तो याद होगा जिसमें धोनी आईसीसी- 20-20 वर्ल्ड कप फाइनल में पाक के खिलाफ अंतिम ओवर किसे दिया जाए इसकी व्याख्या करते दिखाई पड़ते हैं लेकिन कल इंशात शर्मा के अंतिम ओवर (18) को ध्यान से देखे तो इसमें इंशात शर्मा की गेंद फेंकने का कला से ज्यादा कप्तान धोनी की अक्ल काम आई। आइये जानते हैं कैसे?
भारत 129 जैसे छोटे से स्कोर को डिफेंड कर रहा था। इंग्लैंड के शुरुआत के चार विकेट 46 रन पर गिर चुके थे और लगने लगा था कि भारत का पलड़ा अब भारी हैं लेकिन मोरगन और बोपारा की बल्लेबाजी ने पूरे खेल का नक्शा ही बदल दिया था। 16 ओवर हो चुके थे और अब 18वें ओवर की बारी थी। धोनी अबतक समझ चुके थे कि मैच तभी जीतेगें जब मोरगन का विकेट हासिल होगा, लेकिन मोरगन जिस तरह खेल रहे थे उस फार्म को देखकर उन्हें आउट करना असंभव सा लग रहा था। तभी रांची के इस चालाक कप्तान ने उस तरीके को अजमाया जिसे भारत, पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट में मुर्गा फंसाओं तकनीक के नाम से जाना जाता है। कुछ इसी प्रकार की तकनीक का इस्तेमाल कुछ दिन पहले क्रिकेट पर आई एक फिल्म इकबाल (शायद आपने देखी हो) में भी उसके हीरो इकबाल ने अंतिम ओवर किया था।
अपने तीन ओवर में काफी ज्यादा पिट चुके इंशात शर्मा को धोनी ने 18वें ओवर फेंकने की जिम्मेदापी सौंपी तो कमेट्री बाक्स में बैठे विशेषज्ञ भी चौक उठे और उन्होंने इस फैसले की आलोचना की। पहली गेंद इंशात शर्मा ने ऑफ स्टम्प के बाहर फेंकी जो वाइड करार दी गई। दूसरी गेंद पर मोरगन ऑफ की तरफ कुछ ज्यादा निकले तो इंशात शर्मा ने गेंद क्रीज से और ज्यादा बाहर फेंक दी। लगा कि इंशात शर्मा मोरगन से भयभीत है। मोरगन काफी खुश थे कि भारतीय गेंदबाजी की कमर टूट गई है स्कोर था 4 विकेट पर 110 रन। 18 गेंद पर इंगलैंड को 20 रन बनाने थे और फार्म में चल रहे रवि बोपारा और मोरगन क्रीज पर थे।
दो वाइड गेंद फेंकने के बाद मोरगन ने देखा कि धोनी ने ज्यादा फील्डर ऑफ पर लगा रखे हैं और पहली दो वाइड गेंद भी ऑफ के बाहर ही गई हैं। मोरगन को लगा कि धोनी उन्हें ऑफ पर शॉट खिलवाना चाहते हैं। मोरगन यही पर धोनी को और भारत पाक में प्रचलित मुर्गा फंसाओ इस तकनीक की बरीकी को नहीं समझ सके। धोनी का चक्रव्यूह यही था कि दो वाइड गेंद के बाद मोरगन समझ जाएंगे कि इंशात इस बार भी ऑफ के बाहर ही तेज गेंद डालेंगे। लेकिन इंशात ने गेंद तो उन्हें ऑफ के बाहर डाली लेकिन उसे धीमे हाथ से छोड़ा। मोरगन ने ऑफ की गेंद को लेग पर लपेट कर मारने की कोशिश की लेकिन गेंद धीमे से बल्ले पर आई और लेग पर खड़े खिलाड़ी अश्विन के हाथों में गई फिर क्या था भारतीय खेमा उछल पड़ा मोरगन धोनी के जाल में फंस चुके थे इसी के बाद दबाव में आए रवि बोपारा को भी इंशात ने शाटपिच गेंद खिलाई जिसे मारने के चक्कर में वह भी अश्विन के हाथों कैच थमा बैठे।
धोनी ने जिस तरह कल हारते हुए मैच को भारत की तरफ मोड़ा उसके बाद अब यह साबित हो गया कि बड़े टूर्नामेंट में धोनी अपना आपा नहीं खोते है और चालाकी से काम लेते हैं। आईसीसी 20-20 और अब आईसीसी चैम्पियन ट्राफी में उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह भारत के अबतक हुए सबसे सफल ही नहीं सबसे चालाक कप्तान हैं।
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