
क्या कहता है आईसीसी का नियम
धोनी के रन आउट होने से पहले एक फील्डिंग ग्राफिक्स टीवी स्क्रीन पर फ्लैश हो रहा था जिसमे दिखाया जा रहा था कि इस समय 30 गज के दायरे के बाहर कुल 6 फील्डर हैं। यह आईसीसी के फील्डिंग नियमों का उल्लंघन था। उसके बाद ही चर्चाओं और विवाद का दौर शुरू हो गया। आईसीसी का नियम कहता है कि जब तीसरा पॉवरप्ले चल रहा हो तो 30 गज के घेरे के बाहर कोई केवल पांच की फील्डर खड़े हो सकते हैं। जबकि धोनी की बल्लेबाजी के समय जारी ग्राफिक्स दिखा रहा था कि उस समय 6 फील्डर इस दायरे से बाहर खड़े थे। ऐसे में सोशल मीडिया पर तुरंत आईसीसी और मैदानी अंपायरों पर गुस्सा फूट पड़ा कि यह गेंद तो नो-बॉल देनी चाहिए थी।

सामने आया 'नो-बॉल' का सच
इसके बाद जब इस ग्राफिक्स की जांच-पड़ताल की गई तो अब असली सच्चाई खुलकर सामने आई है। अब पता यह चला है कि यह ग्राफिक्स दरअसल ब्रॉडकास्टिंग गलती का नतीजा था। यानी की यह अंपायर की नहीं बल्कि प्रसारणकर्ता की गलती थी जिसके चलते यह गलतफहमी पैदा हुई। हुआ यह था कि 49वें ओवर की पहली गेंद पर न्यूजीलैंड के पांच खिलाड़ी रिंग के बाहर खड़े थे। धोनी ने इस ओवर की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ दिया। ऐसे में जब लॉकी फर्गुसन ने दूसरी गेंद डाली उससे पहले मिड विकेट का फील्डर वापस पीछे ले जाया गया और डीप फाइन को बुलाया गया। धोनी हालांकि इस गेंद पर कोई रन नहीं ले पाए। अब बात करते हैं उस गेंद की जिस पर धोनी रन आउट हुए और सारा विवाद खड़ा हुआ।

यह हुआ था उस गेंद से पहले
तीसरी गेंद से पहले ही एक ग्राफिक्स स्क्रीन पर दिखाई देने लगा जिसमें सर्कल के बाहर 6 फील्डर दिखाए गए थे। यहीं पर गलती हुई थी। इसमें दिखाया गया कि न्यूजीलैंड ने शॉर्ट फाइन लेग फील्डर तैनात किया है लेकिन इसने यह नहीं दिखाया कि थर्ड मैन फील्डर की स्थिति में भी बदलाव किया गया है। जबकि यह बात कॉमेंटेटर इयान स्मिथ ने गेंद डालने से पहले ही स्पष्ट कर दी थी कि थर्ड मैन को बुलाने और फाइन लेग को वापस भेजने के लिए कहा गया। उन्होंने यह भी कहा कि फर्गुसन ने अपनी फील्डिंग खुद सजाई थी।
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