नई दिल्ली। भारत-इंग्लैंड दौरे के बाद अब हर खेल प्रेमी की नजर 15 सितंबर से शुरू हो रहे एशिया कप पर आकर टिक गई है। यह सीरीज अपने आप में अपना एक अलग ही स्थान रखती है। 1984 का वो दौर था जब एक नया टूर्नामेंट क्रिकेट जगत के हिस्से जुड़ा था, जी हां उसका नाम था एशिया कप। इस सीरीज का उद्देश्य ही था कि खेल के माध्यम से साउथ एशियन देश जैसे भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका के बीच संबंध मधुर किए जा सकें। उस वक्त से चला यह सफर काफी उतार चढ़ाव देखने के बाद आज यहां तक पहुंच गया है। हालांकि अगर बात करें उस शुरुआती और पहले मुकाबले की जो शारजहां में खेला गया था। उस वक्त एक बात और बड़ी शानदार थी कि 1983 में भारत ने विश्वकप का खिताब अपने नाम किया था। वहीं इस मुकाबले में भी भारत ने धमाकेदार जीत के साथ आगाज किया था।
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विश्वकप की जीत से लबरेज भारतीय टीम ने अपनी विश्वकप वाली टीम को एशिया कप के इस दौरे पर नहीं भेजा वहीं स्टार खिलाड़ी कपिल देव, श्रीकांत, सैय्यद किरमानी और मोहिंदर अमरनाथ को इस दौरे पर आराम दिया गया। हालांकि टीम में मनोज प्रभाकर, चेतन शर्मा, सुरिंदर खन्ना जैसे खिलाड़ी शामिल थे। वहीं इस सीरीज में भारतीय टीम ने अपना आगाज श्रीलंका पर 10 विकेटों की जी के साथ किया। 41 ओवर में श्रीलंका की टीम महज 96 रन ही बना सकी और चेतन-मदन लाल ने 3-3 विकेट हासिल किए थे। वहीं इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने सुरिंदर खन्ना और गुलाम पारकर की सलामी जोड़ी ने 22वें ओवर में ही जीत हासिल कर ली।
इस दौरे की बात करें तो हर बार की तरह इस बार भी भारत-पाकिस्तान के मुकाबले की लोगों को प्रतीक्षा थी, हालांकि पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 46 ओवर में 188 रन बनाए वहीं एक बार फिर भारतीय ओपनर खन्ना ने शानदार 56 रनों की पारी खेली वहीं संदीप पाटिल नें 43 तो कप्तान गावस्कर ने 36 रनों का पारी खेली लेकिन इसके जवाब में जब पाकिस्तान मैदान में उतरी तो भारतीय टीम ने रोजर बिन्नी और रवि शास्त्री ने 3-3 विकेट झटककर पाकिस्तान को 134 रन पर हीव रोक दिया और 54 रन से शानदार जीत दर्ज की।
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