WTC Final: इतिहास उस 1 घंटे को याद रखेगा जिसको भारत ने प्लान नहीं किया था- आकाश चोपड़ा
नई दिल्लीः पूर्व सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा को लगता है कि भारतीय टीम आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में चाहे कितना भी अच्छा खेले, क्रिकेट प्रशंसक और पंडित केवल उस टीम को याद करेंगे जिसने फाइनल जीता और दिन के अंत में ट्रॉफी पकड़ी।
भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ डब्ल्यूटीसी फाइनल में 8 विकेट से हार गया जिसके साथ कप्तान विराट कोहली का आईसीसी ट्रॉफी के लिए इंतजार जारी है क्योंकि वह 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी के बाद दूसरी बार एक बड़ा टूर्नामेंट फाइनल हार गए थे। दूसरी ओर, कोहली के समकक्ष केन विलियमसन ने पहली बार टेस्ट गदा पर कब्जाई है।

दो साल की कड़ी मेहनत पर भारी पड़ा 1 घंटा- चोपड़ा
चोपड़ा ने बताया कि किस तरह 'अल्टीमेट टेस्ट' के अंतिम दिन एक खराब सत्र ने भारतीय टीम के लिए दो साल की कड़ी मेहनत और सफलता पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि अंतिम दिन विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा के दो विकेट ने उन्हें पहले घंटे में बैकफुट पर ला दिया।
चोपड़ा ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो के लिए लिखा, "यह भारतीय टीम लगातार पांच वर्षों तक टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर रही है, लेकिन दुर्भाग्य से इतिहास उस एक घंटे को याद रखेगा जिसकी भारत ने योजना नहीं बनाई थी। टीमों और कप्तानों की विरासत को उनके द्वारा जीती गई ट्राफियों से डिफाइन किया जाता है; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी लड़ाई जीतते हैं यदि आप युद्ध जीतने में विफल रहते हैं।"
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छठे दिन का खेल गेम चेंजर साबित हुआ-
वैसे तो फाइनल का रिजर्व छठे दिन से पहले सभी 3 रिजल्ट के साथ संतुलन में लटका हुआ था, लेकिन खेल पहले सत्र में न्यूजीलैंड के पक्ष में पूरी तरह से झुका हुआ था। काइल जैमीसन के शानदार स्पेल की बदौलत भारत को बैकफुट पर ला दिया गया। उन्होंने विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा के एक के बाद एक विकेट लिए।
भारत साउथेम्प्टन में एक अच्छे बैटिंग दिन पर भी दूसरी पारी में 170 रनों पर सिमट गया, जिससे न्यूजीलैंड ने केवल 2 विकेट के नुकसान पर 139 रनों का पीछा कर लिया।

खिलाड़ियों के आभामंडल से बाहर निकलना होगा-
भारत की चुभने वाली हार के बाद अब उम्मीद की जा रही है इंग्लैंड के खिलाफ आने वाली टेस्ट सीरीज में पुजारा जैसे खिलाड़ियों पर गाज गिर सकती है। बुमराह ने भी बेहद निराश किया है क्योंकि वे रेड बॉल क्रिकेट की फॉर्म में नहीं हैं। कोहली लंबे समय से छोटी पारियों के दम पर टिके हुए हैं जबकि शुबमन गिल ओपनिंग में निरंतरता खोते जा रहे हैं। रहाणे अच्छे हैं लेकिन कसिंसटेंसी वहां भी गायब है। भारत को अपने खिलाड़ियों के आभामंडल से बाहर निकलकर मैच के दिन परफारमेंस देने वाले लोगों को चुनना होगा। ऐसा अपने आप ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हुआ था जब अनजाने और अनचाहे में पूरी टीम ही लगभग नई उतारनी पड़ गई थी और अप्रत्याशित रिजल्ट निकलकर सामने आया था।
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