Tokyo 2020: भविना पटेल ने किया खुलासा- नर्वस होने की वजह से फाइनल मैच नहीं जीत पाई

नई दिल्लीः टोक्यो पैरालिंपिक की रजत पदक विजेता भविना पटेल ने रविवार को कहा कि वह फाइनल में थोड़ी नर्वस थीं और इसी वजह से विश्व की नंबर एक और चीन की छह बार की स्वर्ण पदक विजेता झोउ यिंग के खिलाफ उनकी हार का कारण बना। भविना ने फाइनल में पहुंचने के लिए तमाम बाधाओं के खिलाफ जंग जीती, लेकिन चीनी दिग्गज से 0-3 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। यह टेबल टेनिस के खेल में भारत का पहला पदक है।

12 साल की उम्र में हो गया था पोलियो-

12 साल की उम्र में हो गया था पोलियो-

34 वर्षीय भविना पटेल को 12 महीने की उम्र में पोलियो होने का पता चला था। उन्होंने महिला एकल टेबल टेनिस वर्ग 4 में अपने पहले पैरालिंपिक गेम्स में शानदार जज्बे का प्रदर्शन किया। भविना ने अभियान का अपना पहला मैच झोउ यिंग से गंवा दिया। लेकिन ग्रुप स्टेज में एक उल्लेखनीय वापसी की पटकथा भावना के हार ना मानने के हौसले ने लिखी हुई थी।

भाविना ने रियो पैरालिंपिक की स्वर्ण पदक विजेता सर्बिया की बोरिसलावा पेरीक-रैंकोविच को 16वें दौर में हराया। फिर, क्वार्टर फाइनल में दुनिया की नंबर तीन खिलाड़ी चीन के झांग मियाओ को मात दी।

फाइनल हारने के बावजूद, भाविना ने इतिहास रच दिया क्योंकि वह पैरालिंपिक पदक जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय महिला बनीं। रविवार से पहले, किसी भी भारतीय ने ओलंपिक या पैरालिंपिक में टेबल टेनिस में पदक नहीं जीता था।

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 'घबराहट के चलते मैं अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाई'

'घबराहट के चलते मैं अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाई'

रविवार को अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद इंडिया टुडे से बात करते हुए, भावना पटेल ने कहा: "मैं थोड़ी नर्वस हो गई, इस वजह से, मैं अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाई। लेकिन मैं अपने अगले टूर्नामेंट में इसे सुधारने की कोशिश करूंगी। एक एथलीट कभी नहीं हारता अगर वह अपना 100 प्रतिशत देता है।

"लेकिन आज, घबराहट के कारण, मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं था।"

गुजरात के वडनगर की 34 वर्षीय पैरा-एथलीट ने पेशेवर स्तर पर टेबल टेनिस खेलना तब शुरू किया जब वह गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रही थी। उन्होंने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था। उन्होंने 2011 में पैरा टेबल टेनिस थाईलैंड ओपन में रजत पदक जीतने के बाद पदक के लिए अपना इंतजार समाप्त कर दिया।

इन वर्षों में, भावना ने कई टूर्नामेंटों में भाग लिया और भारत के लिए 5 स्वर्ण पदक, 13 रजत पदक जीते थे।

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अपनी समस्याओं को पॉजिटिव होकर देखती हूं- भविना

अपनी समस्याओं को पॉजिटिव होकर देखती हूं- भविना

भावना को अपने पहले पैरालिंपिक में भाग लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब उन्हें बड़ा मौका मिला, तो उन्होंने इसका फायदा उठाया।

भाविना ने कहा, "मैं हमेशा इस बात का ध्यान रखती हूं कि मेरे रास्ते में आने वाली समस्याओं के कारण मैं रुक न जाऊं। मेरा मानना ​​​​है कि अगर एक दरवाजा मुझ पर बंद हो जाता है, तो ईश्वर अवसरों के कई अन्य दरवाजे खोल देगा। मैंने अपनी समस्याओं को सकारात्मक रोशनी में देखना सीख लिया है। यह मुझे और अधिक मेहनत करने का साहस देता है।"

उन्होंने कहा कि टोक्यो पैरालिंपिक से बहुत कुछ सीखा है, यह एक अच्छा अनुभव रहा है। और अब यकीन है कि वे अपने अगले ओलंपिक में, अपना 100 प्रतिशत देंगी। उनका ध्यान अब अगले एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों पर होगा।

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Story first published: Sunday, August 29, 2021, 13:09 [IST]
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