गौतम गंभीर ने खोला वीरेंदर सहवाग का राज, बताया- क्यों नहीं खेलते थे मैच की पहली गेंद
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर खेल और उससे जुड़े खिलाड़ियों को लेकर अक्सर अपनी बेबाक राय रखते नजर आते हैं। गौतम गंभीर ने हाल ही में स्टार स्पोर्टस के शो क्रिकेट कनेक्टेड में शिरकत करते हुए अपने पूर्व जोड़ीदार और दिग्गज बल्लेबाजी वीरेंदर सहवाग की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट का चेहरा बदलने का काम किया है। गंभीर का मानना है कि क्रिकेट का कोई भी प्रारूप रहा हो वीरेंदर सहवाग ने टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हुए जो प्रभाव पैदा किया है उसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती।
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उन्होंने सहवाग की तारीफ करते हुए कहा कि एक बल्लेबाज के रूप में कोई भी सहवाग की मानसिकता की नकल नहीं कर सकता।
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सहवाग नहीं खेलते थे पहली गेंद
उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में गौतम गंभीर के अलावा दिग्गज हरफनमौला खिलाड़ी इरफान पठान भी शिरकत कर रहे थे और दोनों ही खिलाड़ियों ने वीरेंदर सहवाग को लेकर अपनी राय साझा की।
इस शो में बात करते हुए जब गौतम गंभीर से पूछा गया कि मैच के दौरान यह कैसे तय होता था कि कौन सा बल्लेबाज पहली गेंद खेलेगा तो इसका हमेशा एक ही जवाब होता था कि पहली गेंद वह नहीं खेलेंगे क्योंकि वह सलामी बल्लेबाज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सहवाग हमेशा कहते थे कि पहली गेंद उसे ही खेलनी चाहिये जो कि सही मायनों में सलामी बल्लेबाज हो। इस कारण गंभीर को ही हमेशा पहली गेंद खेलनी पड़ती थी।

खुद को सलामी बल्लेबाज नहीं मानते थे सहवाग
गौतम गंभीर ने बताया कि वीरेंदर सहवाग ने अपने पूरे करियर के दौरान कभी भी खुद को सलामी बल्लेबाज नहीं माना।
उन्होंने कहा, 'वीरेंदर सहवाग कहते थे कि वह एक सलामी बल्लेबाज नहीं हैं। तो जो भी ओपनर है उसे पहली गेंद खेलनी चाहिए। वह अपने आप को सलामी बल्लेबाज नहीं मानते थे हालांकि उनके नाम दो तिहरे शतक थे, मुझे नहीं पता उन्होंने कितने शतक जमाए। शायद सुनील गावसकर के बाद वह सबसे कामयाब भारतीय सलामी बल्लेबाज हैं लेकिन उन्होंने खुद को कभी ओपनर नहीं माना। तो हमेशा मुझे ही पहली गेंद खेलनी पड़ती थी।'

क्रिेकेट के अलावा करते थे हर तरह की बात
गौतम गंभीर ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वो और सहवाग साथ बल्लेबाजी करते थे वो मैदान पर क्रिकेट को छोड़कर हर तरह की बात किया करते थे। फिर चाहे वो विदेश में घूमने की मनपसंद जगह से लेकर लंच और डिनर में खाने की पसंद ही क्यों न हो।
गंभीर ने कहा, 'सहवाग के माइंडसेट की कॉपी नहीं की जा सकती। कभी नहीं। कई लोग रन बना सकते हैं लेकिन सहवाग के रनों का प्रभाव काफी अहम है। वह किस तरह टेस्ट मैच को सेटअप किया करते थे।'

सहवाग ने हर प्रारूप में किया प्रभावित
इस दौरान गौतम गंभीर ने चेन्नई में खेली गई सहवाग की उस टेस्ट पारी का भी जिक्र किया जिसमें भारत को इंग्लैंड के खिलाफ चौथी पारी में 387 रनों के लक्ष्य का पीछा करना था और उस टेस्ट में सहवाग मैन ऑफ द मैच रहे थे। सहवाग ने 68 गेंद पर 83 रन बनाकर भारत को तेज शुरुआत दी थी। हालांकि सचिन तेंदुलकर ने उस मुकाबले में शतक लगाया था और युवराज सिंह ने 85 रन बनाए थे। गंभीर ने आखिर में कहा कि किसी भी प्रारूप में अगर प्रभाव के लिहाज से देखा जाए तो वीरेंदर सहवाग का कोई मुकाबला नहीं है।
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