जानें क्यों साउथ अफ्रीका में फिर तय है भारत की हार, 3 कारण जिसके चलते इतिहास रचने में नाकाम रहेगी विराट सेना
नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका दौरे पर 3 मैचों की टेस्ट और वनडे सीरीज खेलने के लिये भारतीय क्रिकेट टीम गुरुवार (16 दिसंबर) को रवाना हो गई है। इस दौरे का टेस्ट सीरीज से होगा जिसका पहला मैच सेंचुरियन के मैदान पर 26 दिसंबर से खेला जायेगा, वहीं पर 3 मैचों की वनडे सीरीज का आगाज 17 जनवरी से होगा। भारतीय चयन समिति ने फिलहाल वनडे प्रारूप की टीम का ऐलान नहीं किया है लेकिन रिपोर्ट के अनुसार वो 26 दिसंबर को ही टीम का ऐलान करती नजर आयेगी। चयनकर्ताओं ने टेस्ट टीम के ऐलान के साथ ही रोहित शर्मा को वनडे प्रारूप का नया कप्तान घोषित कर दिया था लेकिन हैमस्ट्रिंग इंजरी के चलते अभी उनके इस दौरे पर उपलब्धता को लेकर कुछ भी साफ नहीं हो सका है। भारतीय टीम के लिये साउथ अफ्रीका का दौरा काफी अहम साबित होने वाला है, जहां पर टीम की कोशिश होगी कि वो सीरीज में जीत हासिल कर न सिर्फ टेस्ट चैम्पियनशिप की अंकतालिका में अपनी स्थिति को सुधारे बल्कि पहली बार साउथ अफ्रीकी सरजमीं पर टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रच सके।
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टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारतीय आज तक साउथ अफ्रीका की सरजमीं पर कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीत सकी है, हालांकि भारतीय टीम के मौजूदा प्रदर्शन और पिछले कुछ सालों में विदेशी सरजमीं पर जीत के आंकड़े को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार यह सपना साकार हो सकता है। साउथ अफ्रीकी सरजमीं पर पहली बार टेस्ट सीरीज जीतना भले ही मुमकिन नजर आता हो लेकिन हम आज उन 3 कारणों पर नजर डालने जा रहे हैं जिसे देखते हुए विराट सेना एक बार फिर से इतिहास रचने में नाकाम होती नजर आ रही है।
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विवाद के बाद बढ़ा कप्तानी के साथ प्रदर्शन का दबाव
साउथ अफ्रीका की सरजमीं पर एक बार फिर से टेस्ट सीरीज में जीत हासिल न कर पाने की सबसे बड़ी वजह ताजा विवाद है। उल्लेखनीय है कि विराट कोहली ने 15 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने पिछले कुछ समय से खुद को लेकर जुड़ी कई अफवाहों का जवाब दिया। इस दौरान कोहली ने रोहित शर्मा के साथ अपने कथित विवाद, वनडे प्रारूप की कप्तानी छिनने की प्रक्रिया, चयनकर्ताओं के साथ कम्युनिकेशन गैप, साउथ अफ्रीका दौरे पर वनडे सीरीज के लिये अपनी उपलब्धता जैसे कई मुद्दों पर जवाब दिया। जहां पर कोहली की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस एक हफ्ते से चले आ रहे विवादों को खत्म करने के लिये थी वहीं पर इस पीसी के बाद कुछ नये विवाद खड़े हो गये हैं, जिसमें ऐसा लग रहा है कि बोर्ड और कोहली के बीच सबकुछ सही नहीं चल रहा है और दोनों के बीच कम्युनिकेशन गैप साफ नजर आ रहा है।
ऐसे में विराट कोहली जब टेस्ट टीम की कप्तानी करने के लिये उतरेंगे तो उनके सामने न सिर्फ टीम के प्रदर्शन का दबाव होगा बल्कि अपने निजी प्रदर्शन का दबाव भी होगा, जिस पर चयनकर्ताओं की खास नजर होने वाली है। विराट कोहली के प्रदर्शन की बात करें साल 2019 में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गये डे-नाइट टेस्ट मैच के बाद से लगातार नीचे गिरता चला गया है। कोहली पिछले 2 साल में किसी भी प्रारूप में एक भी शतक नहीं लगा सके हैं, इतना ही नही जितनी बार वो इन दो सालों में अपना विकेट डक पर गंवा चुके हैं, उतना अपने पूरे करियर के दौरान वो जीरो पर आउट नहीं हुए हैं। ऐसे में जब कोहली साउथ अफ्रीका दौरे पर होंगे तो उनके लिये कप्तानी के साथ-साथ अपने प्रदर्शन पर काम करना भी जरूरी होगा।

रोहित के बाहर होने से कमजोर हुआ टॉप ऑर्डर
जहां भारतीय टीम की बल्लेबाजी में विराट कोहली के लगातार संघर्ष करने की वजह से उन पर विश्वास कम हुआ है तो वहीं पर सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के चोटिल होकर बाहर हो जाने की वजह से टीम को बड़ा झटका लगा है। रोहित शर्मा रविवार (12 दिसंबर) को बायोबबल में प्रवेश करने से पहले अभ्यास सेशन के दौरान चोटिल हो गये जिसकी वजह से उन्हें बाहर होना पड़ा। ऐसे में उनके कवर के रूप में प्रियांक पांचाल को शामिल तो किया गया है लेकिन सलामी जोड़ी की बात करें तो वो केएल राहुल और मयंक अग्रवाल ही रहने वाले हैं। जहां मयंक अग्रवाल मुंबई में शतक लगाने के बाद उतरेंगे तो वहीं पर केएल राहुल इंग्लैंड दौरे के बाद टीम में वापसी कर रहे हैं। लंबे समय बाद वापसी करते हुए बड़ी पारी खेलना आसान नहीं रहने वाला है।
इसके अलावा चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे की जोड़ी भी मध्यक्रम में काफी संघर्ष करती नजर आ रही है, ऐसे में कोहली अगर दोनों के साथ उतरने का फैसला करते हैं तो बल्लेबाजी की धार और भी फीकी हो सकती है। चोटिल होकर इस दौरे पर नहीं खेलने वाले रविंद्र जडेजा की बल्लेबाजी स्किल्स की कमी भी भारतीय टीम को खलने वाली है।

द्रविड़-कोहली की जुगलबंदी और टीम कॉम्बिनेशन
यूं तो भारतीय क्रिकेट टीम के नये हेड कोच राहुल द्रविड़ के साथ विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दूसरे मैच में ही काम करना शुरू कर दिया है लेकिन यह पहली बार होगा जब वो नये टीम मैनेजमेंट के साथ किसी विदेशी दौरे पर इतने लंबे समय के लिये होंगे। विराट कोहली ने 2011 से भारतीय टीम में नियमित रूप से खेलना शुरू किया और लगभग 7 सालों तक इस दौरान रवि शास्त्री उनके डिसीजन मेकिंग का बड़ा हिस्सा रहे। ऐसे में जब वो राहुल द्रविड़ के साथ इस दौरे पर पहुंचेंगे तो यह देखना काफी रोमांचक होगा कि दोनों की जुगलबंदी किस तरह से काम करती है और कैसे उनके फैसले टीम के लिये फायदेमंद साबित होंगे।
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