
कोरोना के चलते खिलाड़ियों के फेफड़ों और दिल पर पड़ेगा असर
बीसीसीआई (BCCI) के सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कि कारडिया टेस्ट से पता लगाया जा रहा है कोरोना से उबरने वाले खिलाड़ी किस हद तक रिकवर हो चुके हैं औऱ वायरस ने उनके शरीर के किस हिस्से पर असर डाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक शरीर से जाने के बाद भी वायरस का असर फेफड़ों पर देखा जा सकता है।
हालांकि कोई भी पुख्ता तौर पर यह नहीं बता पाया है कि कोविड-19 का एथलीट के दिल और फेफड़ों पर कितना असर पड़ेगा। कुछ मामलों में बिना लक्षण के पॉजिटिव पाए गए लोगों में दिल की कुछ बीमारियों के लक्षण मिले हैं।

ठीक होने के बाद 15 दिन का क्वारंटीन जरूरी
साल 2011 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के हाई परफॉरमेंस के मुताबिक खिलाड़ियों को वापसी की जल्दी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, 'यह जीने-मरने का सवाल है। सिर्फ एक सट्रेस टेस्ट से खिलाड़ी के पूरी तरह ठीक होने का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हमें समझना होगा कि यह कि यह एक इंजरी की तरह है। इस बार आईपीएल काफी ज्यादा तापमान वाली जगह खेला जाएगा। आईपीएल में खिलाड़ियों पर काफी दबाव होगा। तेज गेंदबाज जिस तरह का दबाव इस दौरान झेलते हैं उसमें कोविड-19 से उबरने के बाद कैसे काम करेगी हम नहीं जानते। हमें रिकवरी के लिए अच्छी मेडिकल टीम की जरूरत है। दुनिया भर में इसे लेकर शोध हो रहे हैं।'

नेगेटिव आने के बाद भी वापस आ सकता है कोरोना
श्रीराम ने कहा कि जैसे डॉक्टर कह रहे हैं और स्टडी सामने आई है उसके मुताबिक खिलाड़ियों को नेगेटिव टेस्ट होने के बाद भी कम से कम दो हफ्ते तक क्वारंटीन में ही रहना चाहिए।
उन्होने कहा, 'पहले शरीर को स्थिर होने देने की जरूरत है। इसके बाद आराम से मॉनिटर करते हुए खिलाड़ियों के इसीजी और बल्ड टेस्ट किए जाने चाहिए जिससे खिलाड़ियों की रिकवरी के बारे में पता चल सके। बाद में पछताने से बेहतर है कि पहले समझदारी दिखाएं।


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