
संयुक्त विजेता घोषित करने से खुश नहीं आकाश चोपड़ा
उन्होंने कहा,'अगर फाइनल मैच ड्रॉ होता है तो दोनों टीमों को विजेता घोषित कर दिया जायेगा। मुझे नहीं समझ आता कि दो सालों तक चले लंबे टूर्नामेंट के लिये आपने टाय ब्रेकर क्यों नहीं रखा है और आप विजेता का पता लगाने में नाकाम रहते हैं तो चैम्पियनशिप का मजा खराब हो जाता है।'

टाय ब्रेकर के रूप में इस्तेमाल करें रिजर्व डे
आकाश चोपड़ा का मानना है कि विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के दौरान खराब मौसम और परिस्थितियों से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के लिये जो रिजर्व डे रखा गया है उसका इस्तेमाल टाय ब्रेकर के रूप में होना चाहिये।
उन्होंने कहा,'यहां पर एक और चीज रिजर्व डे के रूप में दी गई है जिसका इस्तेमाल तभी होगा जब पहले 5 दिनों के दौरान मौसम या खराब रोशनी के चलते कम से कम 90 ओवर्स का खेल प्रभावित हुआ है नहीं तो छठे दिन का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा। ऐसे में अगर 5 वां दिन कुछ विकेट पहले समाप्त हो जाता है या फिर विपक्षी टीम को सिर्फ 125 रनों की दरकार हो तब समाप्त हो जाता है तो ड्रॉ करार दिया जायेगा। हालांकि आजकल बहुत कम मैच ही ड्रॉ होते हैं और अगर थोड़ी से हरी पिच मिले तो मैच 3 दिन में भी खत्म हो जाता है, ऐसे में आप दो सबसे मजबूत टीमों के बीच मैच देखने जा रहे हैं जहां पर 450 ओवर भी पूरे नहीं पड़ने वाले हैं।'

नियमों में चाहते हैं यह 3 बदलाव
चोपड़ा ने विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल मैच को रोमांचक बनाने के लिये नियमों में 3 बदलाव करने का सुझाव दिया है जिससे विजेता का पता लगाना आसान हो जायेगा।
उन्होंने कहा,'जब आपके पास छठा दिन रिजर्व में रखा है तो उसका इस्तेमाल टाय ब्रेकर के रूप में करने में क्या हर्ज है। आप तब तक खेलिये जब तक कि आपको एक विजेता नहीं मिल जाता। काफी लंबे समय से टाइमलेस टेस्ट मैच नहीं खेले गये जो कि पहले खेले जाते थे, ऐसे में छठे दिन का इस्तेमाल विजेता का पता लगाने के लिये किया जा सकता था। वहीं फाइनल के लिये एक बजाय कम से कम 3 मैचों की सीरीज का आयोजन किया जाना चाहिये था, तीसरा टेस्ट मैच तभी खेलना चाहिये था जब पहले दो मैचों में आपको विजेता न मिले, जो टीम 2 मैच जीत जाती उसे विजेता घोषित कर देना चाहिये था। वहीं अगर तीसरा मैच ड्रॉ हो जाता तो आपको ज्यादा रैंकिंग वाली टीम को विजेता घोषित कर देना चाहिये।'


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