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मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी,हमेशा संघर्ष करती रहीः साइना नेहवाल

नई दिल्ली। रियो ओलंपिक 2016 में देश की उम्मीदों पर खरा उतरने और प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी साइना के कंधों पर ही थी लेकिन दूसरे ही मुकाबले में मिली हार से लेकर करीब 18 महीनों तक घुटने की चोट सहित कई सारे उतार चढ़ाव पूर्व विश्व चैंपियन साइना नेहवाल ने अपनी आंखों से देखा है।

2016 के अंत में घुटने के दर्द से उबरने के बाद आखिरकार रविवार को साइना की वापसी स्वर्ण पदक के साथ हुई। इस सफलता ने साइना को राष्ट्रमंडल खेलों में दो एकल स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बना दिया है। विश्व रैंकिंग में नंबर तीन की खिलाड़ी पीवी सिंधू को हराकर उन्होंने यह सफलता पाई है और विश्व रैंकिंग उनका स्थान अब 12वें स्थान पर है।

एक वेबसाइट से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने प्रदर्शन से बेहद खुश हैं और उनकी फिटनेस को लेकर आलोचना करने वालों का उन्होंने शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उनकी वजह से ही उनमें इतनी जल्द सुधार आया। बातचीत में उन्होंने कहा कि मुझे बहुत आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है लेकिन गोपी सर और मेरे फिजियो क्रिस्टोफर पेड्रा ने मेरा साथ दिया और आज मुझे मिली इस सफलता से मैं बेहद खुश हूं,क्योंकि कॉमनवेल्थ एक बड़ा टूर्नामेंट है हर देश का सपना होता है कि वो इसे जीते। 28 वर्षीय साइना ने कहा कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी,वो लगातार प्रयास कर रही थी कि वो सफल हों और खुद को साबित करें और आज वो इसमें सफल रहीं।

Story first published: Tuesday, April 17, 2018, 14:44 [IST]
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