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Tokyo Olympics : असम की रहने वाली हैं बाॅक्सर लवलीना, जानिए उनके बारे में सब कुछ

tokyo olympics 2021 live: Lovlina Borgohain, Biography, Medals, olympic, Family | वनइंडिया हिंदी

नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक में मैरीकाॅम की हार से भारतीयों का दिल टूटा, लेकिन इसकी भरपाई 23 की बाॅक्सर लवलीना बोरगोहेन ने भारत के लिए एक मेडल पक्का करते हुए कर दी है। लवविना ने वेल्टरवेट वर्ग के क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की चेन नियान चिन को तीसरे राउंड में भी स्पिलिट डिसिजन के साथ 4-1 से हरा दिया। अब वो सेमीफाइनल में पहुंच गईं, साथ ही एक मेडल भी पक्का हो गया। उन्हें ब्राॅन्ज मेडल मिलना तय है। आखिर काैन है लवलीना, जिसने कम उम्र बड़ा काम कर दिखाया, आइए जानें-

ऐसा करने वाली हैं असम की पहली महिला

ऐसा करने वाली हैं असम की पहली महिला

लवलीना ने 2018 के ए.इ.बी.ए. विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप और 2019 के ए.इ.बी.ए. विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में ब्राॅन्ज मेडल अपने नाम किया था। फिर उन्होंने दिल्ली में हुए प्रथम भारतीय ओपन अंतराष्ट्रीय मुक्केबाजी टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल और गुवाहाटी में हुए द्वितीय भारतीय ओपन अंतराष्ट्रीय मुक्केबाजी टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल लेकर सुर्खियां बटोरीं थी। खास बात यह है कि लवलीना असम से पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था और शिव थापा के बाद राज्य की दूसरी मुक्केबाज हैं जिसने जिसने देश का प्रतिनिधित्व किया।

किकबाॅक्सर के ताैर पर की थी शुरूआत

किकबाॅक्सर के ताैर पर की थी शुरूआत

लवलीना असम के गोलाघाट जिले से हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1997 को हुआ था। उनकी माता का नाम टिकेन है और पिता का मामोनी बोरगोहेन है, जो एक लघु-स्तरीय व्यापारी है। अपनी बेटी का भविष्य संबारने के लिए उनके पिता ने कड़ा संघर्ष किया है। उस संघर्ष का परिणाम आज सारी दुनिया के सामने है। आर्थिक रूप से तंगी रही, लेकिन हाैसले बुलंद थे। लवलीना की दो बड़ी बहनें भी हैं जोकि जुड़वां हैं। जुड़वां बहने लिचा और लीमा ने भी राष्ट्रीय पर किकबॉक्सिंग में भाग लिया, लेकिन आर्थिक तंगी से उसे आगे जारी नहीं रख सकी। लवलीना ने भी अपना करियर एक किकबॉक्सर के तौर पर शुरू किया था लेकिन बाद में उन्होंने बाॅक्सिंग में अपना करियर बनाना शुरू कर दिया। भारतीय खेल प्राधिकरण ने उनके हाई स्कूल बर्पथर हाई स्कूल में ट्रायल करवाया, जहां लवलीना ने भाग लिया। यहां से ही प्रसिद्ध कोच पदम बोरो ने उनके प्रतिभा को पहचाना और उनका चयन किया। फिर मुख्य महिला कोच शिव सिंह ने उन्हें ट्रेन किया।

ये हैं लवलीना की उपलब्धियां-

ये हैं लवलीना की उपलब्धियां-

लवलीना के लिए बड़ा माैका 2018 के राष्ट्रमंडल में वेल्टरवेट मुक्केबाजी श्रेणी में भाग लेना बना था। हालांकि क्वार्टरफाइनल में वह ब्रिटेन की सैंडी रयान एस हार गईं थीं। 2018 के राष्ट्रमंडल खेलो में चयन का परिणाम इंडियन ओपन के आरंभिक सफलताओं में देखने को मिला। फरवरी में हुए अंतराष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में वेल्टरवेट श्रेणी में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले नवंबर 2017, वियतनाम हुए एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भी उन्होंने ब्राॅन्ज और जून 2017 में अस्थाना में आयोजित प्रेसिडेंट्स कप में ब्राॅन्जड मेडल अपने नाम किया था।

इसके बाद लवलीना ने जून 2018 में बोरगोहेन ने मंगोलिया में उलानबातर में सिल्वर मेडल जीता और सितम्बर 2018 में पोलैंड में 13वीं अन्तराष्ट्रीय सिलेसियन चैंपियनशिप में ब्राॅन्ज मेडल पर कब्जा किया। मार्च 2020 में एशिया/ओसनिया ओलंपिक क्वालीफायर मुक्केबाजी टूर्नामेंट 2020 में बोरगोहेन ने मुफतुनाखोंन मेलिएवा पर 5-0 से जीत के साथ 69 किलोग्राम वर्ग में अपनी ओलंपिक बर्थ सुनिश्चित की । इसके साथ ही वह असम की अब तक की पहली महिला-खिलाड़ी बन गईं, जिसने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया हो।

Story first published: Friday, July 30, 2021, 10:57 [IST]
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